पटना: मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और सुखाड़ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बिहार सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (CMG) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्यभर में आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वर्ष 2026 में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा किए जा रहे इंतजामों की जानकारी दी। वहीं बिहार मौसम सेवा केंद्र के निदेशक डॉ. सी.एन. प्रभु ने मानसून और मौसम के संभावित पूर्वानुमान से अधिकारियों को अवगत कराया।
राहत सामग्री, नाव और पॉलिथीन शीट की तैयारियों पर फोकस
समीक्षा बैठक में पिछले पांच वर्षों के वर्षापात के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री की उपलब्धता, पॉलिथीन शीट्स का भंडारण, नावों की व्यवस्था और आपदा प्रभावित इलाकों तक त्वरित सहायता पहुंचाने की योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि संभावित आपदा को देखते हुए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके।

NDRF-SDRF की तैनाती और चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा
बैठक में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की तैनाती संबंधी तैयारियों का भी जायजा लिया गया। इसके अलावा मानव और पशु चिकित्सा के लिए दवाओं की उपलब्धता, मेडिकल टीमों के गठन तथा चलंत एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
सरकार ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है।
राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की तैयारी
बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई केंद्रों की स्थापना एवं संचालन संबंधी तैयारियों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों को तुरंत संचालित करने की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर ली जाए।
संभावित सुखाड़ से निपटने की भी बनाई गई रणनीति
बैठक में केवल बाढ़ ही नहीं, बल्कि संभावित सुखाड़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कृषि, जल संसाधन और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर अग्रिम उपायों को लागू करने की रणनीति साझा की गई।

सभी जिलों को सतर्क रहने का निर्देश
बैठक में राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिला पदाधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित प्राकृतिक आपदाओं को लेकर पूरी सतर्कता बरती जाए और आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं को समय रहते तैयार रखा जाए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ और सुखाड़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी सामना करने के लिए सभी विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय और सक्रिय कार्रवाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी आपदा की स्थिति में लोगों को त्वरित राहत, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें, ताकि जनजीवन पर इसका प्रभाव न्यूनतम रहे।

