Bihar News: बिहार सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों की वास्तविक जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजनाएं तैयार की जाएं। साथ ही सिंचाई और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
किसानों को समय पर मिले सिंचाई और बीज की सुविधा
बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बीज वितरण की सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को बुआई के मौसम में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि समय पर बीज उपलब्ध होने से खेती का कार्य सुचारू रूप से संचालित होगा और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
19.85 करोड़ रुपये के प्रभावी उपयोग पर जोर
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 19.85 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इस राशि के उपयोग के लिए वार्षिक कार्ययोजना को स्टेट लेवल सैंक्शनिंग कमेटी (SLSC) की मंजूरी मिलना जरूरी है।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि उपलब्ध राशि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित हो सके और किसानों को योजनाओं का लाभ जल्द मिल सके।
सितंबर 2026 तक बढ़ी योजना की अवधि
अधिकारियों ने जानकारी दी कि WDC-PMKSY 2.0 योजना मूल रूप से वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक लागू थी, लेकिन भारत सरकार ने इसकी अवधि बढ़ाकर सितंबर 2026 तक कर दी है। इससे राज्य में चल रही परियोजनाओं को पूरा करने और नए कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।
कृषि उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही योजना
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जलछाजन विकास योजना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि उत्पादन बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि एवं जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे खेती को नई मजबूती मिल रही है।
राज्यभर में तैनात हैं तकनीकी अधिकारी
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के सफल संचालन के लिए राज्य में 72 कृषि अभियंता, 38 सहायक निदेशक और 46 प्रखंड भूमि संरक्षण पदाधिकारी कार्यरत हैं। ये अधिकारी भूमि एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, तकनीकी मार्गदर्शन और कृषि विकास से जुड़े कार्यों का संचालन कर रहे हैं।
WDC-PMKSY 3.0 की तैयारी पर भी फोकस
समीक्षा बैठक के अंत में कृषि मंत्री ने आगामी WDC-PMKSY 3.0 के लिए तैयारियां शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की समृद्धि, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि किसानों के हितों से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

