Bihar News: अब कार्बाइड नहीं, वैज्ञानिक तकनीक से पकेंगे फल; राइपनिंग चैंबर पर सरकार दे रही मोटी सब्सिडी

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Bihar News: बिहार सरकार राज्य में फल उत्पादकों की आय बढ़ाने और आधुनिक बागवानी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। कृषि विभाग के अंतर्गत उद्यान निदेशालय द्वारा फलों के सुरक्षित, वैज्ञानिक और नियंत्रित परिपक्वन (रिपनिंग) को बढ़ावा देने के लिए राइपनिंग चैंबर की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 35 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित उद्यान निदेशालय की समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत निर्धारित ‘दोगुनी आय-दोगुना रोजगार’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार और उचित मूल्य

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में केला सहित कई फलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। लेकिन कटाई के समय बाजार में एक साथ अधिक मात्रा में उपज आने से किसानों को अक्सर कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है। पर्याप्त राइपनिंग चैंबर नहीं होने के कारण फलों का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव नहीं हो पाता, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि राइपनिंग चैंबर की सुविधा उपलब्ध होने से फलों को नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित रखा जा सकेगा और बाजार की मांग के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बेचा जा सकेगा। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

कार्बाइड मुक्त और सुरक्षित तरीके से पकेंगे फल

राइपनिंग चैंबर में तापमान, आर्द्रता, वायु संचार और एथिलीन गैस का वैज्ञानिक नियंत्रण किया जाता है। इससे कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और फल प्राकृतिक रूप से समान रूप से पकते हैं।

इस तकनीक के उपयोग से फलों की गुणवत्ता, स्वाद, रंग, सुगंध और शेल्फ लाइफ में सुधार होता है। बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं।

35 प्रतिशत अनुदान, 35 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन तक सहायता

कृषि मंत्री ने बताया कि योजना के अंतर्गत राइपनिंग चैंबर की स्थापना पर 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 35,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन क्षमता तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

यह योजना किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, उद्यमियों और फल उत्पादकों के लिए आधुनिक बागवानी ढांचा विकसित करने का सुनहरा अवसर है।

एफपीओ, महिला समूह और युवाओं को मिलेगा लाभ

सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक परिपक्वन, सुरक्षित भंडारण, बेहतर विपणन और आधुनिक कृषि मूल्य-श्रृंखला से जोड़ना है। इससे कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कृषि मंत्री ने किसानों, एफपीओ, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिक राइपनिंग चैंबर जैसी सुविधाएं बिहार को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और उच्च मूल्य वाली बागवानी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में मदद करेंगी।

सात निश्चय-3 के लक्ष्य को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि राइपनिंग चैंबर जैसी आधुनिक तकनीकों के विस्तार से किसानों को फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा, फल बर्बादी में कमी आएगी और राज्य में बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इससे सात निश्चय-3 के तहत रोजगार और आय बढ़ाने के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।

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