पटना: बिहार में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने परीक्षा सुधार को लेकर गठित होने वाली विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हरीश कुमार को अधिसूचित किया है।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। इस समिति का उद्देश्य राज्य के विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए सुझाव और अनुशंसाएं तैयार करना है।
परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग की 23 अगस्त 2026 की अधिसूचना में परीक्षा सुधार को लेकर एक विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रावधान किया गया था। समिति राज्य में होने वाली विभिन्न परीक्षाओं की प्रक्रिया की समीक्षा कर परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी सुझाव देगी। इस पहल के दायरे में राज्य सरकार के अधीन आने वाले विभिन्न परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और अन्य भर्ती संस्थाएं शामिल हैं।
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार को मिली जिम्मेदारी
सामान्य प्रशासन विभाग ने 24 अगस्त को इस संबंध में पटना हाईकोर्ट के महानिबंधक से अनुरोध किया था। इसके बाद महानिबंधक की ओर से 28 अगस्त को न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नाम की अनुशंसा की गई।
सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति हरीश कुमार को परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
BPSC, BSSC समेत कई भर्ती एजेंसियों पर पड़ेगा असर
इस समिति की भूमिका बिहार में होने वाली विभिन्न सरकारी और विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिसूचना की प्रतिलिपि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC), बिहार तकनीकी सेवा आयोग, बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग और बिहार पुलिस से संबंधित भर्ती आयोग समेत संबंधित संस्थाओं को भी भेजी गई है।
इससे संकेत मिलता है कि परीक्षा सुधार से जुड़ी प्रक्रिया राज्य की अलग-अलग भर्ती और परीक्षा एजेंसियों के कामकाज से भी जुड़ सकती है।
परीक्षाओं में पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था पर जोर
राज्य सरकार का यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर भविष्य में परीक्षा आयोजन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों या व्यवस्थाओं में बदलाव की संभावना बन सकती है।

