पटना: बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। परिवहन विभाग राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। सरकार का दावा है कि यदि वर्ष 2030 तक राज्य के कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की हो जाती है, तो हर साल करीब 7.5 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत होगी।
यह पहल न केवल ईंधन की खपत कम करेगी, बल्कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
2030 तक 30 फीसदी ई-वाहनों का लक्ष्य
परिवहन विभाग के अनुसार, राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल वाहनों में 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में हाल ही में राज्य कैबिनेट की बैठक में भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
सरकार का मानना है कि ई-वाहनों की संख्या बढ़ने से करोड़ों रुपये मूल्य के ईंधन की बचत होगी और राज्य में हरित परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ईवी खरीदने वालों को मिल रहा है भारी फायदा
राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले लोगों को कई तरह के प्रोत्साहन दे रही है। ई-वाहनों पर टैक्स में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। वहीं, विशेष योजनाओं के तहत महिलाओं को अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान
मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना के तहत:
- ई-चारपहिया वाहन खरीदने पर 1 लाख रुपये तक का अनुदान
- ई-दोपहिया वाहन खरीदने पर 12 हजार रुपये तक की सहायता
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार और पर्यावरण अनुकूल परिवहन से जोड़ना है।
चार्जिंग स्टेशन लगाने पर मिलेगा लाखों का अनुदान
बिहार सरकार केवल ई-वाहनों की खरीद को ही नहीं, बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। राज्य में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों, पेट्रोल पंपों, होटल-मोटल्स, बस टर्मिनलों, पार्किंग स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। चार्जिंग स्टेशन लगाने वाले उद्यमियों और संस्थानों को सरकार आकर्षक सब्सिडी दे रही है।
चार्जिंग स्टेशन पर मिलने वाला अनुदान
- एसी चार्जर (3 गन्स) – मध्यम चार्जर
- खरीद लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 15,000 रुपये तक अनुदान
- पहले 900 चार्जरों तक लागू
- एसी चार्जर (2 गन्स) तेज चार्जर / डीसी चार्जर (2 गन्स)
- उपकरण लागत का 75 प्रतिशत या अधिकतम 37,500 रुपये तक अनुदान
- पहले 450 चार्जरों तक लागू
- चाडेमो (CHAdeMO) फास्ट चार्जर
- लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक अनुदान
- पहले 90 चार्जरों तक लागू
विभाग के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर कुल अनुदान राशि 75 हजार रुपये से लेकर 2.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
प्रदूषण कम होगा, पर्यावरण को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा और शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार लाएगा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सरकार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और चार्जिंग नेटवर्क दोनों में तेजी आएगी, जिससे बिहार देश के अग्रणी ईवी राज्यों में शामिल हो सकेगा।

