Bihar HDI Report: बिहार ने बीते दो दशकों में विकास के विभिन्न सामाजिक और आर्थिक मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए देश के सामने एक नई विकास गाथा पेश की है। योजना एवं विकास विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में राज्य ने तेज गति से सुधार किया है।
मानव विकास सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006 से 2023 के बीच बिहार का मानव विकास सूचकांक (HDI) 0.485 से बढ़कर 0.614 तक पहुंच गया। यह लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि है, जो इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत वृद्धि से अधिक बताई गई है। सरकार का दावा है कि यह सुधार शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में लगातार हुए निवेश का परिणाम है।
गरीबी कम करने में देश में सबसे आगे बिहार
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच बिहार में गरीबी दर 51.89 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत रह गई। यानी महज कुछ वर्षों में 18.13 प्रतिशत अंकों की कमी दर्ज की गई, जो देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक मानी जा रही है।
सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, आवास और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से यह उपलब्धि हासिल हुई है।
20 साल में प्रति व्यक्ति आय में 13 गुना उछाल
आर्थिक मोर्चे पर भी बिहार ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2004 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय जहां 5,780 रुपये थी, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 76,490 रुपये तक पहुंच गई। यानी लगभग 13 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में बिहार ने करीब 13 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर हासिल की, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई गई है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़ा निवेश
विकास व्यय में लगातार बढ़ोतरी का असर सामाजिक क्षेत्रों में भी दिखाई दिया है। वर्ष 2005-06 में प्रति व्यक्ति विकास व्यय 1,463 रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 13,279 रुपये हो गया।
इसी अवधि में स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च में लगभग 14.8 गुना और शिक्षा पर व्यय में 13.2 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सकारात्मक असर स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक ढांचे पर देखने को मिला है।
संस्थागत प्रसव और जीवन प्रत्याशा में सुधार
स्वास्थ्य क्षेत्र के आंकड़े बताते हैं कि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत वर्ष 2005-06 के 19.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 81.1 प्रतिशत हो गया है। वहीं जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 64.2 वर्ष से बढ़कर 69.5 वर्ष तक पहुंच गई है।
पोषण के क्षेत्र में भी बेहतर परिणाम
बच्चों में कुपोषण से जुड़े कई संकेतकों में बिहार ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार ठिगनापन (Stunting), कम वजन (Underweight) और क्षीणता (Wasting) के मामलों में राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक सुधार देखने को मिला है।
रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत
पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2024 के अनुसार बिहार की बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 3.2 प्रतिशत से कम है। इसे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
SDG रैंकिंग में भी मजबूत हुई स्थिति
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में भी बिहार ने अपनी स्थिति मजबूत की है। स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG-6) के क्षेत्र में राज्य 98 अंकों के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहा। वहीं स्वास्थ्य एवं कल्याण (SDG-3) में बिहार का स्कोर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। राज्य का समग्र SDG स्कोर भी बेहतर हुआ है, जिसके चलते बिहार अब ‘Performer’ श्रेणी में शामिल हो चुका है।
विकसित बिहार के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
योजना एवं विकास विभाग का कहना है कि मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में मिली उपलब्धियां विकसित बिहार के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य आने वाले वर्षों में समावेशी और सतत विकास की दिशा में और तेज गति से आगे बढ़ने का प्रयास करेगा।

