पटना: बिहार में वरिष्ठ नागरिकों की सुविधाओं और सम्मान को लेकर सरकार ने कई अहम कदम उठाने की दिशा में जोर दिया है। समाज कल्याण विभाग की ओर से आयोजित वरिष्ठ नागरिकों की राज्य परिषद की बैठक में वृद्धाश्रमों की सुविधाओं को बेहतर करने के साथ-साथ बैंकों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बुजुर्गों के लिए अलग व्यवस्था बनाने पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा, सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और मौजूदा वृद्धाश्रमों को और बेहतर बनाया जाएगा।
बिहार में बनेंगे 139 वृद्धाश्रम
बैठक में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि राज्य में 139 वृद्धाश्रमों के निर्माण की योजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के अनुसार, उचित भूमि उपलब्ध होते ही इन वृद्धाश्रमों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास और देखभाल की सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा।
मौजूदा वृद्धाश्रमों को बेहतर बनाने पर जोर
बैठक में ‘Paid Old Age Homes’ की जरूरत पर भी चर्चा हुई। इस मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि बिहार की पारिवारिक और सामाजिक परंपरा बुजुर्ग माता-पिता को अपने साथ सम्मान के साथ रखने की रही है। इसी वजह से सरकार का मुख्य जोर पहले से संचालित वृद्धाश्रमों को गुणवत्तापूर्ण, व्यवस्थित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने पर है। वहीं पेड ओल्ड एज होम की व्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
गुलजारबाग वृद्धाश्रम का मंत्री ने किया था औचक निरीक्षण
बैठक में वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की देखभाल और उनके साथ व्यवहार को लेकर सदस्यों ने कुछ चिंताएं भी रखीं।
इस पर मंत्री ने अपने हालिया पटना के गुलजारबाग स्थित वृद्धाश्रम के औचक निरीक्षण का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वहां रहने वाले बुजुर्ग संतुष्ट और खुश नजर आए। मंत्री के मुताबिक, बुजुर्गों ने खुद बताया कि उन्हें समय पर दवाइयां, देखभाल और आत्मीयता मिल रही है। वहां के कर्मचारी भी संवेदनशीलता के साथ उनकी जरूरतों का ध्यान रख रहे हैं।
स्कूलों में बुजुर्गों के सम्मान की शिक्षा पर जोर
बैठक में एक सदस्य ने सुझाव दिया कि युवा पीढ़ी में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर स्कूल स्तर पर नैतिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मंत्री ने इस सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि बच्चों में बचपन से ही दादा-दादी और अन्य बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना जरूरी है। इस पहल का उद्देश्य केवल सरकारी सुविधाएं बढ़ाना नहीं, बल्कि परिवार और समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत करना भी है।
बैंक और अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग लाइन
वरिष्ठ नागरिकों के रोजमर्रा के अनुभव को आसान बनाने के लिए बैठक में अस्पतालों, बैंकों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अलग लाइन और Special Counter की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा अस्पतालों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग वार्ड की सुविधा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। अगर इन प्रस्तावों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो बुजुर्गों को इलाज और बैंकिंग जैसी जरूरी सेवाओं के लिए लंबा इंतजार करने से राहत मिल सकती है।
लगातार होती रहेंगी वरिष्ठ नागरिक परिषद की बैठकें
मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और जरूरतों को समझने के लिए इस तरह की बैठकें आगे भी नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को केवल नीतिगत स्तर पर देखने के बजाय उनकी वास्तविक जरूरतों के आधार पर सुविधाओं में सुधार करना है।
बैठक में गृह, स्वास्थ्य, वित्त, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रतिनिधियों के साथ परिषद के सदस्य भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एच. आर. श्रीनिवास के स्वागत संबोधन से हुई। बैठक के अंत में सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के निदेशक ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

