Bihar News: बिहार में नकली और अपंजीकृत कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर कृषि विभाग अब पूरी तरह सख्त हो गया है। कृषि निदेशालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनलों को साफ निर्देश दिया है कि केवल पंजीकृत और वैध कीटनाशकों की ही बिक्री और प्रचार सुनिश्चित किया जाए।
कृषि निदेशक Saurabh Suman Yadav के निर्देश पर विभाग ने नकली, संदिग्ध और अपंजीकृत कीटनाशकों की बिक्री और प्रचार-प्रसार पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। विभाग के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कीटनाशकों की बिक्री की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
यूट्यूब और सोशल मीडिया पर भी विभाग की नजर
कृषि विभाग ने कहा कि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया पेज और यूट्यूब चैनल अपंजीकृत कीटनाशकों, फफूंदनाशकों, खरपतवारनाशकों और चूहानाशकों का प्रचार कर रहे हैं। यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है।
विभाग ने स्पष्ट किया कि देश में केवल वही कीटनाशक बेचे जा सकते हैं जो कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पंजीकृत हैं। नकली और फर्जी उत्पादों के इस्तेमाल से फसल खराब होने, मिट्टी की उर्वरता घटने, स्वास्थ्य पर असर पड़ने और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने का खतरा रहता है।
ई-कॉमर्स कंपनियों को सख्त निर्देश
कृषि निदेशालय ने सभी डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी परिस्थिति में अपंजीकृत या संदिग्ध उत्पादों की बिक्री और प्रचार को बढ़ावा न दिया जाए।
विभाग ने कहा कि यदि किसी कंपनी, वितरक या विक्रेता द्वारा ऑनलाइन माध्यमों से अवैध कीटनाशकों की बिक्री की जानकारी मिलती है, तो संबंधित जिला के सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को तुरंत सूचना दी जाए। शिकायत मिलने पर संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से भी की गई खास अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही पंजीकृत कीटनाशक खरीदें। यदि कोई उत्पाद संदिग्ध लगे तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें।
विभाग ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और सुरक्षित कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

