Bihar  News: भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप! राघोपुर बांध का 30 मीटर हिस्सा टूटा, रात-दिन जारी है बचाव अभियान

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भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। खरीक प्रखंड में स्थित इस बांध के अलग-अलग हिस्सों पर पिछले कई दिनों से कटाव की स्थिति बनी हुई है। नदी के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर बचाव और सुरक्षा कार्य चलाया जा रहा है।

काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध गंगा के बाएं किनारे पर लगभग 6.50 किलोमीटर लंबा है। बांध पर पांच नोज बनाए गए हैं। नदी की मुख्य धारा के बीच शोल बनने के कारण पानी का दबाव बांध की ओर बढ़ गया है। यही वजह है कि मानसून की शुरुआत से ही इस क्षेत्र में कटाव का खतरा बना हुआ है।

26 जुलाई को 110 मीटर हिस्से में दिखा था कटाव

गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद 26 जुलाई 2026 को डी-नोज के समीप लगभग 110 मीटर लंबाई में कटाव देखा गया था। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं की मौजूदगी में दिन-रात राहत एवं बचाव कार्य कराया गया।

लगातार किए गए प्रयासों के बाद 27 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे कटाव को नियंत्रित कर लिया गया। इसके बाद प्रभावित हिस्से को और मजबूत करने के लिए करीब 110 मीटर लंबाई में छह मीटर चौड़ा एनसी बेस तैयार किया गया। सुरक्षा के लिए बांस रोल और हाथी पांव जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया।

डी-नोज के अपस्ट्रीम हिस्से में नदी के दबाव को देखते हुए करीब 250 मीटर क्षेत्र में 10-10 मीटर के अंतर पर 25 स्लोपिंग बेड बार भी तैयार किए गए।

एक महीने से लगातार चल रहा है बचाव अभियान

26 जुलाई से 24 अगस्त 2026 के बीच बांध के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर कटाव की स्थिति सामने आती रही। विभाग ने संवेदनशील स्थानों पर तत्काल बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराकर बांध को सुरक्षित रखने की कोशिश की।

स्थिति की निगरानी के लिए पहले से तैनात एक सहायक अभियंता और चार कनीय अभियंताओं के अलावा अलग-अलग शिफ्ट में अतिरिक्त इंजीनियरिंग टीम लगाई गई है। प्रत्येक शिफ्ट में एक सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंता मौजूद हैं। इसके अलावा एक अतिरिक्त कार्यपालक अभियंता को भी मौके पर तैनात किया गया है।

17 अगस्त से अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की विशेष टीम भी लगातार क्षेत्र में कैंप कर रही है।

रात से ही बढ़ गया था नदी का दबाव

विभाग के अनुसार 23 अगस्त की रात से ई-नोज के डाउनस्ट्रीम हिस्से में गंगा के अत्यधिक दबाव को देखते हुए लगातार बचाव कार्य चल रहा था। हालांकि नदी के तेज कटाव के कारण 24 अगस्त को तड़के करीब 2 बजे राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का लगभग 30 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

इसके बाद दोनों कट-एंड को सुरक्षित रखने और पानी के संभावित फैलाव को रोकने के लिए रिंग बांध बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।

2.50 लाख बालू भरे बोरे, 20 नाव और भारी मशीनरी मौके पर

बचाव अभियान को तेज करने के लिए प्रशासन और विभाग ने बड़ी संख्या में संसाधन मौके पर लगाए हैं। अधिकारियों के अनुसार: करीब 2.50 लाख बालू भरे बोरे उपलब्ध हैं। 20 नावों को लगाया गया है। 16 ट्रैक्टर मौके पर काम कर रहे हैं। 1 पोकलेन और 2 जेसीबी मशीनें तैनात हैं।लगभग 250 श्रमिक लगातार युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और संवेदनशील हिस्से की लगातार निगरानी की जा रही है।

डीएम और एसएसपी भी कर रहे निगरानी

स्थल की स्थिति पर विभागीय वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। भागलपुर के जिला पदाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने भी मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली है। अधिकारियों की टीम को शिफ्ट के आधार पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

फरक्का बराज के गेट खोलने की मांग

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए फरक्का बराज से नदी के पानी की जल्द निकासी का मुद्दा भी उठाया गया है। इस संबंध में बराज के महाप्रबंधक को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया गया है। वहीं, बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। बराज पर गेट संचालन की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेने के लिए जल संसाधन विभाग की एक टीम को वहां भेजा गया है।

फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर

भागलपुर के खरीक क्षेत्र में गंगा का दबाव और कटाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि भारी संख्या में संसाधन, श्रमिक और अभियंताओं की तैनाती के साथ बचाव कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों का फोकस फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से को स्थिर करने, पानी के फैलाव को रोकने और बांध को आगे होने वाले कटाव से सुरक्षित रखने पर है।

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