अगर आप अपने घर की बिजली की जरूरतों के लिए ग्रिड पर डिपेंड नहीं रहना चाहते तो हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम आपके काम आ सकता है।सही बैटरी के साथ यह आपको एनर्जी इंडिपेंडेंट बना देगा।ऐसे में सवाल उठता है कि घर पर लगे सोलर सिस्टम के लिए कौन-सी बैटरी इस्तेमाल करनी चाहिए।अगर मार्केट में मौजूदा ऑप्शन को देखें तो Lithium-ion और Lead-acid बैटरी के बीच ही कंपीटिशन रहता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दोनों तरह की बैटरियां कैसे काम करती हैं और इनमें से किसकी लागत कम है और किसके फायदे ज्यादा हैं।
Lithium-ion बैटरी में कैथोड पर लिथियम आयरन फॉस्फेट और निकल मैंग्नीज कॉबाल्ट जैसे लिथियम कंपोनेंट लगे होते हैं, जबकि एनोड पर ग्रेफाइट होता है। यह फास्ट मूविंग लिथियम आयन को यूज कर एनर्जी स्टोर करती है। जब सोलर पैनल से बिजली बनती है तो लिथियम आयन पॉजिटिव प्लेट से नेगेटिव प्लेट की तरफ जाते हैं और जब यह स्टोर्स एनर्जी को यूज करती है तो आयन वापस नेगेटिव प्लेट से पॉजीटिव प्लेट की तरफ आते हैं।
अगर Lead-acid बैटरी की बात करें तो पॉजीटिव और नेगेटिव दोनों ही लेड प्लेट होती हैं, जिन्हें सल्फ्यूरिक एसिड के बीच रखा जाता है, जो इलेक्ट्रोलाइट का काम करता है। जब बैटरी चार्ज होती है तो लीड प्लेट्स और एसिड के बीच रिएक्शन होती है।जब ये बैटरी डिस्चार्ज होती है तो यह रिएक्शन रिवर्स हो जाती है।
कीमत के मामले में लिथियम-आयन बैटरी महंगी पड़ती है। अगर kWh के हिसाब से देखें तो लिथियम-आयन बैटरी की कीमत लगभग 15,000-20,000 रुपये प्रति kWh आती है।इसकी तुलना में लीड-एसिड बैटरी लगभग 8,000-12,000 रुपये प्रति kWh के हिसाब से मिल जाएगी। अब सवाल उठता है कि क्या कीमत कम होने के कारण लीड-एसिड बैटरी सही ऑप्शन है? इसका जवाब है कि अगर आप सिर्फ अपफ्रंट कीमत देख रहे हैं तो ये बैटरी आपके लिए सही है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं।
लिथियम-आयन बैटरी की शुरुआती लागत भले ही ज्यादा है, लेकिन इसके फायदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।लिथियम-आयन बैटरी लीड बैटरी की तुलना में जल्दी चार्ज होती है और इसकी लाइफ भी ज्यादा होती है। लेड बैटरी जहां 3-5 साल चलती है, वहीं लिथियम-बैटरी 10 साल से ज्यादा चल जाती है। इसी तरह लिथियम बैटरी लेड बैटरी की तुलना में साइज में छोटी और वजन में हल्की होती है।लेड बैटरी को बार-बार देखरेख की जरूरत पड़ती है और लिथियम बैटरी में ऐसा झंझट नहीं होता।लिथियम बैटरी पर ब्लूटूथ से ही नजर रखी जा सकती है। इस तरह देखा जाए तो सोलर सिस्टम के लिए लिथियम-आयन बैटरी एक बेहतर ऑप्शन है।

