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राहुल गांधी ने अमेठी छोड़ा,दक्षिण के वायनाड के अलावा उत्तर भारत के रायबरेली से लड़ेंगे चुनाव

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सोनिया गांधी के रायबरेली छोड़कर राजस्थान से राज्यसभा सदस्य चुने जाने और इसके बाद उनके द्वारा रायबरेली से गांधी परिवार के ही किसी सदस्य के रायबरेली से चुनाव लड़ने की बात कहे जाने के बाद रायबरेली और यहां से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रियंका गांधी की चर्चा जोरों से होने लगी।इसके बाद चुनाव की अधिघोषणा होने के बावजूद अमेठी से राहुल गांधी की उम्मीदवारी की घोषणा में हो रही विलंब की वजह से अमेठी और राहुल गांधी की भी चर्चा जोरों से होने लगी।तरह – तरह के कयास लगाए जाने लगे।खासकर अमेठी से बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने तरह के तंज कस के और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट बढ़ेरा ने अमेठी से चुनाव लड़ने की बात कह कर मामले को और ज्यादा दिलचस्प और चर्चा का विषयवस्तु बना दिया था।लेकिन अब इस चर्चा पर विराम लग जायेगी क्योंकि नामांकन के अंतिम दिन अब कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में की इन दोनो ही चर्चित सीटें अमेठी और रायबरेली से अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए।

अमेठी और रायबरेली से कांग्रेस ने उमकीदवारों की घोषणा की

उत्तर प्रदेश के चर्चित अमेठी और रायबरेली दोनों ही सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाले प्रेस रिलीज में कांग्रेस पार्टी के महासचिव केसी वेणु गोपाल ने कांग्रेस के सेंट्रल इलेक्शन कमिटी के द्वारा चुने गए दोनों सीटों के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी।इस प्रेस रिलीज के अनुसार पहला नाम श्री राहुल गांधी का है जो रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे, जबकि दूसरा नाम श्री किशोरी लाल शर्मा का है जो अमेठी से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे।

2004 ईस्वी से 2024 ईस्वी तक राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी का यहां बोलबाला रहा

गौरतलब है कि यूपीए की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्ष 2004 से 2024 तक रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, हालांकि वह अब राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुकीं हैं। रायबरेली की बात करें तो यह राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी का पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र रहा है।अमेठी के साथ-साथ रायबरेली गांधी-नेहरू परिवार के पारंपरिक क्षेत्र रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस परिवार के सदस्यों ने दशकों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है।

प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा दोनों रहे खाली हाथ

रायबरेली और अमेठी सीट को लेकर लंबे समय से उहापोह की स्थिति में चल रहे कांग्रेस ने जब इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की तो इसमें ना तो प्रियंका गांधी का नाम शामिल था और ना ही रॉबर्ट वाड्रा का।हालांकि पूर्व में लगाए जा रहे कयासों के अनुसार रायबरेली से सबसे ज्यादा संभावना प्रियंका गांधी के ही चुनाव लड़ने को लेकर लगाए जा रहे थे,लेकिन आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस पार्टी ने रायबरेली से राहुल गांधी के नाम की घोषणा कर दी और अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को अपना प्रत्याशी बना दिया। प्रियंका गांधी की जगह पर राहुल गांधी को रायबरेली से उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने भले ही सोनिया गांधी की रायबरेली की जनता से की उस वायदे की लाज रख ली, जिसमें उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में राय बरेली से गांधी परिवार के ही किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाने की बात कही थी। रॉबर्ट वाड्रा को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने की बात कांग्रेस पार्टी या गांधी परिवार की तरफ से कभी नहीं कही गई ,अलबत्ता रॉबर्ट वाड्रा ने खुद को गांधी परिवार का सदस्य बताते हुए और जनता द्वारा उन्हें चुनाव लड़ने के लिए मनुहार किए जाने की बात कह कर अमेठी में खूब ड्रामेबाजी की थी।तब इसे लेकर बीजेपी की अमेठी सीट से उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने जीजा की उम्मीदवारी को लेकर तरह-तरह के तंज भी कैसे थे।

अमेठी की तुलना में राहुल गांधी के लिए ज्यादा सुरक्षित है रायबरेली

वैसे तो अमेठी और रायबरेली यह दोनों ही सीटें कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है, लेकिन अमेठी और रायबरेली इस दोनों के हालिया इतिहास को देखें तो 2004 से लेकर 2024 के बीच रायबरेली पर हमेशा से कांग्रेस और गांधी परिवार का कब्जा जा रहा है। जबकि इस दौरान अमेठी से 2019 ईस्वी में हुए चुनाव में तो खुद राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष रहते हुए भी बीजेपी के स्मृति ईरानी के हाथ पराजित होना पड़ा। 2024 ई के लोकसभा चुनाव में भी अमेठी से बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में स्मृति ईरानी ही चुनावी मैदान में है।गुरुवार तक अमेठी से चुनाव को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी घोषित नहीं किए जाने पर तरह-तरह की बातें कह कर स्मृति ईरानी ने जनता को अपने पक्ष में करने का बड़ा प्रयास भी किया है।साथ ही स्मृति ईरानी ने अपने पक्ष में जोरदार हवा बनाने के लिए इस बात की भी हवा उड़ा दी है कि चुनाव जीतने के बाद राहुल गांधी अमेठी छोड़ फिर वायनाड चले जाएंगे और यहां की जनता से वादाखिलाफी करेंगे। इसके विपरीत रायबरेली छोड़ राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बनने के बाद सोनिया गांधी ने रायबरेली की जनता से पत्र के द्वारा भावुक अपील करते हुए अपनी अनुपस्थिति में यहां से गांधी परिवार के ही किसी सदस्य को चुनाव लड़ने की बात कही थी। राहुल गांधी के रूप में इस वायदा के पूरा होने का लाभ भी राहुल गांधी को इस चुनाव में मिलेगा।साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने रायबरेली से जिस दिनेश प्रताप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है, वह 2019 ई के चुनाव में सोनिया गांधी के हाथ पराजित हो चुका है।

रायबरेली और अमेठी से बीजेपी के उम्मीदवार

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने अमेठी और रायबरेली दोनों ही जगह पर इस बार भी अपने 2019 के पुराने प्रत्याशियों पर ही भरोसा जाताया है। भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को रायबरेली सीट से दिनेश प्रताप सिंह को भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामित किया है दिनेश प्रताप सिंह 2019 ई के लोकसभा चुनाव में भी रायबरेली से भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार रह चुके हैं।हालांकि तब ये कांग्रेस के सोनिया गांधी के विरुद्ध चुनाव लड़े थे,जिसमें उन्हें सोनिया गांधी के हाथों हार मिली थी। ऐसे में एक बार अब जबकि सोनिया गांधी वहां से प्रत्याशी नहीं है और कांग्रेस ने उनकी जगह पर राहुल गांधी को उतारा है, दिनेश प्रताप सिंह पूरी शिद्दत के साथ राहुल गांधी को हराने का प्रयास करेंगे।बात अगर अमेठी लोकसभा क्षेत्र की की जाए तो यहां से भारतीय जनता पार्टी ने2014 और 2019 ईस्वी में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ने वाली स्मृति ईरानी को ही चुनावी मैदान में उतारा है। 2019 ई से पूर्व 2014 ईस्वी में हुए लोकसभा चुनाव में हालांकि स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें राहुल गांधी के हाथ पराजय झेलनी पड़ी थी।हालांकि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने पिछली हार का बदला राहुल गांधी को हराकर ले लिया था। इस तरह से स्मृति ईरानी और राहुल गांधी के बीच चुनावी मामला एक-एक से टाई रहा था।इस बीच 2024 की लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राहुल गांधी को किसी करणविशेष से यहां के चुनावी परिदृश्य से हटा लिया है।ऐसे में अब स्मृति ईरानी का सामना यहां किशोरी लाल शर्मा से होगा।

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