भारत जल्दी बुला सकता है मालदीव से अपने सैनिकों को वापस

0
111

यों तो भारत और मालदीव के बीच के संबंध बिगड़ने की शुरुआत तभी से हो गई थी, जब मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चुनाव के दौरान भारत विरोधी बातें किया करते थे। उनके राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप यात्रा को लेकर जब उनके तीन मंत्रियों ने अपमानजनक टिप्पणी की तो भारत और मालदीप के संबंध थोड़े और बिगड़ गए, हालांकि बाद में मालदीव ने इन तीनों मंत्रियों को निलंबित कर दिया था। फिर जो रही सही कसर थी वह मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने अपनी चीन की यात्रा से लौटकर यह कहकर पूरा कर दिया कि भारत 15 मार्च से पहले अपने सैनिकों को मालदीव से वापस बुला ले। भारत भी अब मालदीव को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि बिगड़े संबंध के बाद भारत अगले महीने होने वाले उच्च स्तरीय कुल समूह की वार्ता के दौरान भारतीय सैनिकों की वापसी के लिए योजना पर चर्चा करने के लिए तैयार हो गया है। गौरतलब है कि इस समय मालदीव में भारत के दो एएलएच हेलीकॉप्टर,एक डोर्नियर और एक अपतटीय गश्ती जहाज तैनात है। इसके ऑपरेशन के लिए वहां भारतीय सैनिक भी मौजूद है, जिसे वापस लाने के लिए मालदीव के राष्ट्रपति ने हाल ही में भारत सरकार से कहा है।

मालदीव से सेना वापस बुलाने को लेकर भारत सरकार ने नहीं दिया है आधिकारिक बयान

चीन की अपने अधिकारिक विदेश यात्रा पुरी का वापस मालदीव लौटने के बाद मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा था कि 17 मार्च को महत्वपूर्ण मजलिस चुनाव से 2 दिन पहले 15 मार्च तक भारत अपने सैनिकों को वापस बुला ले।भारत सरकार ने इसे लेकर अभितक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। इस बीच 14 और 15 जनवरी को कोर ग्रुप की पहली बैठक में मालदीप के प्रतिनिधि अली नासिर ने मालदीव में भारतीय उच्चायुक्त मुनु महावर से 15 मार्च तक सैनिकों की जगह नागरिकों को वापस भेजने के लिए कहा था।

माले में मेयर का चुनाव हारने से भारत से और ज्यादा खफा है मुइज्जू सरकार

दरअसल 14 जनवरी को राष्ट्रपति मुइज्जू की पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी से माले में मेयर का चुनाव हार गई जिससे उसे एक बड़ा झटका लगा। खासकर इस बात के लिए की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी भारत के साथ संबंध बनाए रखना चाहती है।

भारतीय संपत्तियों को चीनी संपत्तियां से बदलने के लिए चीन से मदद मांग सकती है मालदीव की सरकार

अपने चीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने वहां चीन के साथ चार दर्जन से भी ज्यादा ज्यादा योजनाओं को लेकर समझौता किया है। ऐसे में उसे उम्मीद है कि चीन की चीन की जिनपिंग सरकार भारतीय संपत्तियां के बदले में मालदीप की आर्थिक मदद कर सकता है।साथ ही जिस प्रकार से इसने चीन से वापस मालदीव लौटते ही भारतीय सैनिकों की वापसी की मांग जोरदार तरीके से उठाना शुरू किया है,उससे भी इसे चीनी आका का वरदहस्त मिलने की संभावना है।बात अगर मालदीप की अर्थव्यवस्था की बात करें तो एक तो यह इस समय नकदी की तंगी से जूझ रहा है और ऊपर से अगर इसे भारतीय संपत्ति के बदले में नकदी राशि चुकानी पड़ी तो यह उसकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बोझ बन सकता है।गौरतलब है कि मालदीव पर चीन और भारत का कर्ज़ इस समय उसकी जीडीपी का 30% और 10% है। ऐसे में उसे भारतीय परिसंपत्ति के बदले में 10 करोड़ डॉलर का भुगतान करना पड़ेगा।

मालदीव सिर्फ भारतीय सैनिकों की वापसी का ही उठा रहा मुद्दा

भारत के साथ बातचीत में मालदीव के मंत्री ने सिर्फ रक्षा कर्मियों की वापसी का ही मुद्दा उठाया था।मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू भी सिर्फ भारतीय सैनिकों की वापसी की ही बात करते हैं।भारत द्वारा वित्त पोषित और प्रबंधित ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर उसने कोई चर्चा नहीं की है। गौरतलब है कि मालदीव में शुरू की गई यह सबसे बड़ी बुनियादी परियोजना है। इस परियोजना को भारत से 100 मिलियन डॉलर के अनुदान और 400 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन के तहत वित्तपोषित किया गया है। इस परियोजना में 6.74 किलोमीटर लंबे पुल और कौजवे लिंक की परिकल्पना की गई है जो माले को विलिंगली , गुलहिफालहू और चिलाफुशी के निकटवर्ती दीपों से जोड़ेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here