Homeदेशबांग्लादेश की हालत ख़राब ,अब तक 900 भारतीय लौटे भारत

बांग्लादेश की हालत ख़राब ,अब तक 900 भारतीय लौटे भारत

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न्यूज़ डेस्क 
बांग्लादेश में लगातार हो रही हिंसा के बीच पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है। अब तक 900 से ज्यादा भारतीय छात्र सुरक्षित लौट चुके हैं। भारतीय सीमा से होते हुए नेपाल और भूटान के भी कई छात्र बांग्लादेश से वापस आ रहे हैं। 

बांग्लादेश में बीते एक हफ्ते से जारी हिंसा के बीच अब पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है। अब तक पुलिस हिंसा को रोकने में प्रभावी नहीं रही है, ऐसे में उग्र स्थितियों को काबू करने के लिए सेना को पट्रोलिंग पर लगाया गया है। गृहमंत्री असदुज्जमां खान ने एलान किया कि राजधानी ढाका समेत बाकी सभी जिलों में भी सेना को तैनात किया जाएगा। 

बांग्लादेश में नौकरी में आरक्षण में कोटा व्यवस्था के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन में अभी तक 105 लोगों की मौत हो चुकी है। पूरे बांग्लादेश में कर्फ्यू लगाया गया है और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। 

बांग्लादेश से भारत लौट रहे भारतीय नागरिक और छात्र पश्चिम बंगाल में गेडे सीमा पार से भारत में प्रवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताहिक बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारतीय उच्चायोग बांग्लादेश में फंसे भारतीयों को सुरक्षा देने के लिए वहां पर अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और एडवाइजरी जारी कर रहे हैं।

बता दें कि बांग्लादेश में छात्रों को मिलाकर करीब 15 हजार भारतीय रह रहे हैं जिनमें से इन 900  को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया गया है। 
क्यों हो रही ये हिंसा?

दरअसल ये छात्र 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के लिए लड़े गए संग्राम में लड़ने वाले नायकों के परिवार के सदस्यों के लिए सरकारी नौकरी का कोटा खत्म करने की मांग कर रहे हैं। इस कोटा में महिलाओं, दिव्यांगों और जातीय अल्पसंख्यक समूहों के लिए सरकारी नौकरियां भी आरक्षित है। 
साथ ही बांग्लादेश के 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के परिवार के सदस्यों को भी नौकरी दी जाती है। साल 2018 में इस सिस्टम को निलंबित कर दिया गया था जिससे उस समय इसी तरह के विरोध प्रदर्शन रुक गए थे। लेकिन पिछले महीने बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने एक फैसला दिया था जिसके मुताबिक 1971 के दिग्गजों के आश्रितों के लिए 30% कोटा बहाल करना था।

प्रदर्शनकारी छात्र इस कोटा के तहत महिलाओं, दिव्यांगों और जातीय अल्पसंख्यकों के लिए 6% कोटा का तो समर्थन कर रहे हैं लेकिन वो ये नहीं चाहते कि इसका लाभ 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दिग्गजों के परिवार के सदस्यों को मिले। इसलिए इस फैसले का विरोध शुरू हो गया जो अब भीषण हिंसा में बदल चुका है।

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