पीठ में हो रहा दर्द हर बार नहीं होता नॉर्मल, हो सकता है किडनी पेन

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अक्सर लोग पीठ में होने वाले दर्द को नॉर्मल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता, कई मामलों में यही दर्द किडनी से जुड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। किडनी शरीर का एक जरूरी अंग है, जो खून से गंदगी और टॉक्सिंस को फिल्टर करने का काम करती है।ऐसे में अगर इसमें किसी तरह की दिक्कत हो जाए तो उसका असर दर्द के रूप में महसूस हो सकता है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पीठ में हो रहा दर्द हर बार नॉर्मल नहीं हो सकता है, कई बार यह किडनी पेन भी हो सकता है।

किडनी पेन आमतौर पर पसलियों के नीचे, पीठ के दोनों ओर या एक तरफ महसूस होता है।यह दर्द अंदर की तरफ गहराई में होता है और कई बार पेट या ग्राेइट तक फैल सकता है। यह दर्द हल्का और लगातार भी हो सकता है या फिर तेज और लहरों में आने वाला हो सकता है, खासकर जब पथरी की समस्या हो।

किडनी का दर्द और सामान्य पेट दर्द में फर्क करना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण होते हैं जो इसे पहचाने में मदद करते हैं।दरअसल किडनी पेन आमतौर पर पीठ के साइड में होता है, जबकि सामान्य पीठ दर्द बीच हिस्से में होता है. यह दर्द गहरा और लगातार बना रहता है जबकि मांसपेशियों का दर्द आराम या पोजीशन बदलने से कम हो जाता है। किडनी से जुड़ा दर्द कई बार जांघ या पेट की तरफ भी फैल सकता है। अगर दर्द के साथ पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, खून आना, बुखार या मतली जैसे समस्या हो तो यह किडनी से जुड़ा संकेत हो सकता है।

किडनी में दर्द कई वजह से हो सकता है। सबसे आम कारणों में किडनी स्टोन और संक्रमण शामिल है। इसके अलावा पेशाब रुकना, यूरिन का उल्टा बहाव, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, किडनी में सूजन, सिस्ट या चोट भी दर्द का कारण बन सकते हैं। कुछ मामलों में किडनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी इसके पीछे हो सकते हैं।हालांकि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण कम दिखाई देते हैं।

किडनी पेन के साथ कुछ दूसरे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।जैसे पेशाब करते समय दर्द या जलन, बार-बार पेशाब लगना, पेशाब में खून या धुंधलापन, बुखार और ठंड लगना, उल्टी या मतली शरीर में कमजोरी या थकान यह लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि समस्या सिर्फ मांसपेशियों की नहीं बल्कि किडनी या यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी है।

किडनी पेन का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है।संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवा दी जाती है, जबकि पथरी में दवाओं से लेकर प्रक्रिया या सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर मामलों में जहां किडनी सही से काम नहीं कर रही हो, डायलिसिस जैसे प्रक्रियाएं भी करनी पड़ सकती है।

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