NCERT की किताबों में अब नहीं मिलेगी’बाबरी मस्जिद’, कारसेवकों का जिक्र नहीं, अयोध्या खंड पर भी चली कैंची

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न्यूज डेस्क
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) की 12वीं कक्षा की राजनीतिशास्त्र की संशोधित किताब में अयोध्या विवाद को लेकर बाबरी मस्जिद से जुड़े कई बदलाव किये गये हैं। अयोध्या खंड को चार से घटाकर दो पृष्ठों का कर दिया गया है। गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक भाजपा की रथयात्रा, विवादित ढांचा गिराये जाने के बाद भड़के दंगे जैसे विवरणों को हटा दिया गया है।

एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने बदलाव का बचाव करते हुए कहा कि स्कूली पाठ्यपुस्तकों में दंगे और विध्वंस के बारे में क्यों पढ़ाया जाना चाहिए। हम सकारात्मक नागरिक बनाना चाहते हैं, न कि हिंसक और अवसादग्रस्त व्यक्ति।

राजनीतिशास्त्र की पुरानी पुस्तक में 1986 में विवादित ढांचे के ताला खोले जाने से लेकर दोनों तरफ से लामबंदी का विवरण दिया गया था। सांप्रदायिक तनाव, राम मंदिर के निर्माण में कारसेवकों की भूमिक, 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे विध्वंस के बाद गुजरात समेत अन्य भागों में सांप्रदायिक हिंसा,भाजपा शासित राज्यों में राष्ट्रपति शासन और भाजपा की ओर से अयोध्या की घटनाओं पर खेद व्यक्त करने जैसे विवरण को शामिल किया गया था। पुस्तक संशोधित संस्करण में इस विवरण को एक पैराग्राफ में समेट दिया गया है।

भगवाकरण के आरोपों को खारिज करते हुए सकलानी ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव वार्षिक पुनरीक्षण का हिस्सा है ओर इस पर शोर शराबा नहीं होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि 1984 के दंगों का विवरण पाठ्यपुस्तकों में नहीं होने को लेकर तो हंगामा नहीं किया गया। सकलानी ने सवाल किया कि क्या हमे अपने छात्रों को इस तरह से पढ़ाना चाहिए कि वे आक्रामक हो जाएं, समाज में नफरत पैदा करेंया नफरत का शिकार बन जाएं, क्या यही शिक्षा क उद्देश्य है,क्या हमें इतने छोटे बच्चों को दंगो के बारे में पढ़ाना चाहिए। जब वे बड़े होंगे तो वे इसके बारे में सीख सकते हैं,लेकिन स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से क्यों.. जब वे बड़े हों तो उन्हें समझने दें कि क्या हुआ और क्यों हुआ। बदलावों को लेकर हो हल्ला अप्रासंगिक है।

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