Homeदेशदक्षिण भारत के रडार पर सनातन धर्म ,उत्तर भारत में बवाल !

दक्षिण भारत के रडार पर सनातन धर्म ,उत्तर भारत में बवाल !

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न्यूज़ डेस्क 

अचानक सनातन धर्म सामने आ गया। धर्म इंसान को मजबूत करता है या कमजोर इसकी व्याख्या सब अपनी तरीके से करते  हैं।  धर्म तो आस्था का विषय है। लेकिन इसमें भेद नहीं। जो सनातनी हैं उनका भी एक ख़ास जीवन है। उनके कुछ आचार -विचार हैं ,संस्कार हैं और पूजा पद्धति भी। लेकिन जो सनातनी नहीं है वह भी जीने का कोई मार्ग चुन ही लेते हैं। जो किसी भी धर्म को नहीं मानते उन्हें आप क्या कहते हैं ? वे भी तो जीते हैं। उनकी नजर में सबक यही और चार्वाक का दर्शन ही सर्वोपरि है। दक्षिण भारत से सनातन को लेकर उठा बयान उत्तर भारत के लोगों को कुछ ज्यादा ही कचोट रहा है। सनातन के सामने सभी समस्याएं खत्म हो गई !     
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने उदयनिधि स्टालिन के ‘सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए’ वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रियांक खड़गे ने कहा कि कोई भी धर्म जो समान अधिकार नहीं देता, वो बीमारी के समान है।
                          दरअसल, चार सितंबर को डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि सनातन धर्म को मलेरिया की तरह खत्म कर देना चाहिए। उनकी इस वाली टिप्पणी का प्रियांक खड़गे ने समर्थन किया और कहा कि कोई भी धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता है या यह सुनिश्चित नहीं करता है कि आपको इंसान होने का सम्मान मिले, वह मेरे अनुसार धर्म नहीं है। उदयनिधि के बयान का समर्थन करते हुए खड़गे ने कहा कि कोई भी ऐसा धर्म, जो सभी लोगों को समान अधिकार नहीं देता है, या फिर किसी के साथ इंसानों जैसा व्यवहार नहीं करता, वो बीमारी के समान है।
                         उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे हैं। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि मैं फिर से कह रहा हूं कि मैंने केवल सनातन धर्म की आलोचना की है और सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए। ये बात मैं लगातार कहूंगा। कुछ लोग बचकाना व्यवहार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मैंने नरसंहार के लिए आमंत्रित किया है, जबकि अन्य कह रहे हैं कि द्रविड़म को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। क्या इसका मतलब यह है कि डीएमके वासियों को मार दिया जाना चाहिए?
                   बीजेपी  ने उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म’ टिप्पणी पर चुप्पी के लिए इंडिया  गठबंधन के सहयोगियों राहुल गांधी, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की कड़ी आलोचना की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी गुट पर वोट बैंक की राजनीति के लिए हिंदू धर्म का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले पर उनकी चुप्पी चौंकाने वाली और चौंकाने वाली है।
                      रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया से की है। बड़ा सवाल ये है कि राहुल गांधी चुप क्यों हैं? दो दिन हो गये। राहुल गांधी कहते हैं कि वे हिंदू है और मंदिरों में जाते हैं। वे साबित कर रहे हैं कि उन्होंने वोट के लिए ऐसा किया। नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव चुप क्यों हैं?इंडिया ब्लॉक वोट के लिए हिंदू धर्म का विरोध कर रहा है। उनकी मूल सोच हिंदू विरोधी है। वोट के लिए किसी भी हद तक जाने की यह उनकी प्रवृत्ति है।
                        उदयनिधि ने बीजेपी पर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने और फर्जी खबर फैलाने का आरोप लगाते हुए अपने खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहने की बात कही। 

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