न्यूज़ डेस्क
शिवसेना और फिर एनसीपी की टूट के बाद महाराष्ट्र की स्वाभिमानी शेतकारी संगठन पार्टी अब टूट के कगार पर है। पार्टी के दो बड़े नेताओं राजू शेट्टी और उनके ख़ास करीबी रहे रविकांत तुपकर अब आमने सामने हैं और एक दूसरे पर जानकर हमला भी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि तुपकर अब आगे की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं और पार्टी में बंटवारा चाहते हैं। जानकार कह रहे हैं कि यह सब बीजेपी का किया धरा खेल है। बीजेपी अभी भी वहां ऑपरेशन लोटस का खेल कर रही है। आगे और भी खेल हो सकते हैं। बीजेपी के निशाने पर कांग्रेस भी है।
अब रविकांत तुपकर ने अपने नेता और पार्टी के प्रमुख राजू सेट्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी के अधिकतर लोग उनके साथ हैं और पार्टी उनकी ही होनी चाहिए। जिस तरह से तुपकर गरज रहे हैं उससे इस बात का अंदेशा बढ़ गया है कि अब राजू सेट्टी की पार्टी स्वाभिमानी शेतकरी संगठन को टूटने से कोई नहीं बचा सकता।
जानकारी के मुताबिक राजू सेट्टी लगातार तुपकर से संपर्क साध रहे हैं लेकिन उनका फोन अन रिचेबल बता रहा है। यह खेल ठीक वैसा ही जब शिवसेना में टूट की सम्भावना बढ़ी थी। उद्धव ठाकरे लगातार एकनाथ शिंदे से संपर्क करना चाह रहे थे और शिंदे का मोबाइल बंद आ रहा था। अब महाराष्ट्र के लोग भी मान रहे हैं कि शेट्टी की पार्टी होगी और ऐसा होता है तो यह महाराष्ट्र ले लिए एक रिकॉर्ड होगा क्योंकि साल भर के भीतर तीन पार्टियां बीजेपी की राजनीति का शिकार हो जाएगी। हालांकि बीजेपी अभी इस पुरे मामले में चुप है लेकिन खबर मिल रही है कि फडणवीस के ख़ास नेता आशीष देशमुख ने तुपकर को बीजेपी में शामिल होने का ऑफर दिया था।
महाराष्ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन पार्टी कुछ इलाकों में काफी मजबूत है। इस पार्टी की पहुँच चार पांच जिलों में बताई जाती है। ये वे जिले हैं जहाँ गणना ुर कपास की खेती होती है और वहां के किसानो के बीच इस पार्टी की अच्छी पकड़ है। महाराष्ट्र की सियासत में स्वाभिमानी पक्ष का हातकंगाले, कोल्हापुर, सतारा, सांगली, माढ़ा आदि में मजबूत पकड़ है। पार्टी शुरू से गन्ना और कपास किसानों के मुद्दों को उठाती रही है। 2019 में इन 5 में से 4 सीटें एनडीए गठबंधन के पास है। मराठी अखबार दिव्य मराठी के मुताबिक राजू शेट्टी ने पार्टी के भीतर बगावत के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है. शेट्टी ने कहा कि पार्टी तोड़ना बीजेपी का आधिकारिक काम हो गया है. बीजेपी अब तक राष्ट्रीय समाज पार्टी, शिव संग्राम पार्टी, शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़ चुकी है .
उधर शेट्टी ने कहा कि तुपकर के पीछे बीजेपी ही है। इसे न मानने के पीछे किसी तरह की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हम तुपकर से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वे नहीं मानते हैं, तो फिर पार्टी आगे की कार्रवाई करेगी।
महाराष्ट्र में सहकारी आंदोलन के बड़े नेता थे- शरद अनंत राव जोशी. 80 के दशक में उन्होंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ किसानों के समर्थन में कई आंदोलन किए। राजू शेट्टी भी जोशी के साथ आंदोलन में जुड़ गए। 2004 में जोशी और शेट्टी में मतभेद हो गए। शेट्टी ने जोशी की पार्टी को तोड़ते हुए स्वाभिमान शेतकारी संगठन का गठन किया। 2004 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शेट्टी निर्दलीय ही सिरोली सीट से सदन पहुंचने में कामयाब रहे। 2009 में शेट्टी ने हातकंगाले लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने एक सीट पर जीत हासिल की। इसके बाद स्वाभिमानी पक्ष का दबदबा बढ़ता गया. 2009 के लोकसभा चुनाव में शेट्टी की पार्टी को 1.3 प्रतिशत वोट मिला।
2014 के लोकसभा चुनाव में शेट्टी की पार्टी ने एनडीए के साथ गठबंधन किया। समझौते के तहत स्वाभिमानी पक्ष को सतारा, माढ़ा और हातकंगाले सीट मिला। हालांकि, पार्टी एक ही सीट हातकंगाले पर जीत दर्ज कर पाई। पार्टी के वोट प्रतिशत में जबर्दस्त उछाल आया। लोकसभा चुनाव 2014 में स्वाभिमानी पक्ष को 9.8 फीसदी वोट मिला। 2017 में पार्टी ने किसानों के मुद्दे पर एनडीए से नाता तोड़ लिया। 2015 में चुनाव आयोग ने सही जानकारी नहीं देने के लिए स्वाभिमानी पक्ष का सिंबल रद्द कर दिया था।

