चीन अपने नए आविष्कारों से चौंका रहा है। अब वह मोबाइल नेटवर्क के क्षेत्र में कुछ नया करने की तैयारियों में जुटा है। चीन के शंघाई में आयोजित MWC 2026 में हुवावे (Huawei) ने गीगाअपलिंक सॉल्यूशन को पेश किया जिसकी बात करना भारत के संदर्भ में भी बहुत जरूरी है। दरअसल, मौजूदा समय में मोबाइल नेटवर्क में डेटा का उपयोग बहुत बढ़ गया है। पहले मोबाइल डेटा में डाउनलोडिंग अधिक होती थी। अब अपलोडिंग भी उतनी ही हो रही है। इसे मोबाइल एआई (Mobile AI) का दौर कहा जा रहा है। चीन में आयोजित इवेंट में दिग्गज कंपनियों और एक्सपर्ट का मानना था कि मोबाइल एआई के दौर में ‘अपलिंक’ यानी डेटा भेजने और अपलोड करने की क्षमता का मजबूत होना जरूरी है
हुवावे का गीगाअपलिंक सॉल्यूशन मुख्य रूप से हार्डवेयर से जुड़ा बदलाव है। इसमें एडवांस मल्टी एंटीना टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंट स्पेक्ट्रम के साथ-साथ डिवाइस-नेटवर्क और नेटवर्क कॉलोबोरेशन एल्गोरिदम का उपयोग करके नेटवर्क को बेहतर बनाया जाता है। हुवावे का कहना है कि यह उन टेलिकॉम ऑपरेटर्स के लिए अच्छा तरीका है जो मोबाइल एआई के लिए पावरफुल नेटवर्क तैयार करना चाहते हैं।
हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि हुवावे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही है। इस वजह से उसके मोबाइल उपकरण चीन से बाहर बहुत सीमित हैं। हुवावे की तरह ही चीन की जेडटीई भी टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली प्रमुख कंपनी है।
चीन में उठी नियम बनाने की मांग
चीन में मोबाइल एआई सर्विसेज के लिए नियम बनाने की मांग भी होने लगी है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन कम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स एसोसिएशन (CCSA) के चेयरमैन डॉ. वेन कु ने एक प्रस्ताव समिट में दिया। इसमें कहा गया है कि मोबाइल एआई सेवाओं की जांच के लिए तय मानक बनाए जाने चाहिए, जैसे वॉयस कॉलिंग की क्वालिटी जांचने के लिए मीन ओपिनियन स्कोर (MOS) का इस्तेमाल होता है।
मोबाइल एआई की बात इसलिए अधिक की जा रही है, क्योंकि अब टेलिकॉम नेटवर्क पर इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट में डाउनलोड और अपलोड दोनों का महत्व बढ़ रहा है।
कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में बेहतर अपलिंक यानी डाउनलोड और अपलोड स्पीड, कम लेटेंसी से ही भविष्य के नेटवर्क की दिशा तय होगी। आसान भाषा में कहें तो लोगों तक जिस कंपनी का नेटवर्क बेहतर पहुंचेगा, उसीउसी के कनेक्शन ज्यादा होंगे।
इसमें कोई शक नहीं कि भारत ने अपनी टेलिकॉम सेवाओं को बहुत तेजी से मजबूत किया है और प्रमुख टेलिकॉम कंपनियां 5जी का रोलआउट कर चुकी हैं, लेकिन मोबाइल नेटवर्क पर डेटा की खपत लगातार बढ़ रही है। एआई के बढ़ते उपयोग और भविष्य में और अधिक उपयोग की संभावनाओं के कारण मोबाइल नेटवर्क में जितनी अहमियत डाउनलोड स्पीड की होगी, उतनी ही अपलोड स्पीड की भी होगी।
अभी अपलोड स्पीड, डाउनलोड स्पीड से काफी कम होती है। नेटवर्क को अपग्रेड करके जो इस दूरी को खत्म करेगा और बेहतर अपलोड स्पीड दे पाएगा, उसे ग्राहकों का साथ मिल सकता है।

