Homeदुनियाटैरिफ को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहेगा अमेरिका

टैरिफ को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहेगा अमेरिका

Published on

राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते साल जब ऑफिस संभाला था, उसके बाद से उन्होंने ये साफ कर दिया था कि वो अमेरिका फर्स्ट के स्लोगन को गंभीरता से लागू करेंगे। इसी दिशा में ट्रंप ने टैरिफ नीति को जियो पॉलिटिकल और रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। ट्रंप इस टैरिफ नीति को कितना महत्व देते हैं, ये इस बात से ही पता चलता है कि महज दो दिन पहले ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेफॉर्म टूथ सोशल पर कहा था कि अमेरिका का व्यापार घाटा 78% कम हुआ है, और इसके लिए उन्होंने दूसरे देशों पर लगाए टैरिफ को क्रेडिट दिया था।

जानकारों का मानना है कि भले ही ट्रंप अपने फैसलों को लेकर बेहद मुखर रहे हैं, लेकिन बीते दशक में दूसरी वैश्विक शक्तियों के सामने अमेरिका की इमेज बतौर एक सुपरपावर थोड़ी फीकी हुई है, जिसे दुरुस्त करने की कोशिश पूर्व के अमेरिकी प्रशासन ने भी की थी। बाइडेन प्रशासन ने चीन की सेमीकंडक्टर तक पहुंच को सीमित करने के लिए व्यापार प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया था, लेकिन ट्रंप ने इसे अपनी विदेश नीति और डिप्लोमेसी में टैरिफ का खुलेआम कह कर इस्तेमाल किया। टैरिफ कूटनीति की जगह ले ली। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अमेरिका के साझेदारों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय हालातों में बहुत ज्यादा फर्क देखने को नहीं मिलेगा।

टैरिफ को ट्रंप स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं और ऐसा लगता नही कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के द्वारा टैरिफ मामले में बड़ा झटका लगने के बावजूद वे इसमें कोई बड़ा बदलाव करेंगे। अगर वे इसकी वैधता ठहराने के लिए इमरजेंसी प्रावधान का इस्तेमाल नहीं भी करते हैं तो भी और कई कानून हैं, जिनके तहत वे टैरिफ लागू कर सकते हैं। फिलहाल 15 फीसदी ड्यूटी लगाने के लिए ट्रंप ने सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है ,लेकिन अपनी टैरिफ नीतियों के लिए वो सेक्शन 232, और सेक्शन 301 का भी सहारा ले सकते है। यानी दूसरे कानून है जिनके तहत टैरिफ नीति जारी रह सकती है। अभी मौजूदा वक्त में वो केवल इमरजेंसी प्रावधान का इस्तेमाल नहीं कर सकते। ट्रंप पहले से ही कहते रहे हैं कि उनकी टैरिफ नीतियां अमेरिका के खिलाफ अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेस को खत्म करने के लिए लाई गई है। ऐसे में उसमें फिलहाल कोई परिवर्तन आता नही दिख रहा है।

जानकारों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय ग्लोबल ऑर्डर और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को ध्यान में रखते हुए दूसरे देशों के पास अमेरिका से बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है। देशों के लिए टैरिफ युद्ध से निपटना एक चुनौती रही है, जिसकी प्रतिक्रिया सभी ने अपने अपने हिसाब से ही दी है।

जानकार कहते हैं कि अमेरिका में इस घटनाक्रम के बाद भी दुनिया के देशों की विदेश नीति में कोई खास बदलाव नहीं आएगा। अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंध हो या फिर जियो पॉलिटिकल मुद्दों पर रुख, कोई भी देश अपने हितों को ध्यान में रखकर ही विदेश नीति को आकार देगा।

Latest articles

रैपर से नेता बने बालेन शाह की RSP नेपाल में भारी जीत की ओर

नेपाल के रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की मध्यमार्गी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP)...

JDU में शामिल होते ही नीतीश कुमार से मिले निशांत, पिता को खिलाई सोनपापड़ी

  बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला ह. लंबे समय तक बिहार...

UTS ऐप बंद होने पर फंसी यात्री,आपकी ट्रेन न छूटे इसलिए दूसरे ऐप पर हो जाएं शिफ्ट

1 मार्च से रेलवे की UTS ऐप बंद हो चुकी है, जिसके चलते मीनू...

क्या 150 साल तक जिंदा रह सकता है इंसान? इस रिसर्च के बाद शुरू हुई बहस

मानव जीवन को लंबा करने का विचार लंबे समय से साइंटिस्ट को आकर्षित करता...

More like this

रैपर से नेता बने बालेन शाह की RSP नेपाल में भारी जीत की ओर

नेपाल के रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की मध्यमार्गी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP)...

JDU में शामिल होते ही नीतीश कुमार से मिले निशांत, पिता को खिलाई सोनपापड़ी

  बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला ह. लंबे समय तक बिहार...

UTS ऐप बंद होने पर फंसी यात्री,आपकी ट्रेन न छूटे इसलिए दूसरे ऐप पर हो जाएं शिफ्ट

1 मार्च से रेलवे की UTS ऐप बंद हो चुकी है, जिसके चलते मीनू...