देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव का कहर जारी है।बाहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंच रहा है, ऐसे में लोग राहत पाने के लिए घंटों एसी में रहना पसंद कर रहे हैं। ऑफिस हो, कार हो या घर, अब बिना एसी के रहना मुश्किल सा लगने लगा है। लेकिन डॉक्टरों और रिसर्चर्स का कहना है कि लगातार एसी में रहने की आदत धीरे-धीरे इंसान की गर्मी सहने की प्राकृतिक क्षमता को कमजोर कर सकती है।
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट webmd के एक्सपर्ट के अनुसार, हमारा शरीर मौसम के हिसाब से खुद को ढालने की क्षमता रखता है। जब हम गर्म वातावरण में रहते हैं, तो शरीर पसीना निकालकर खुद को ठंडा रखना सीखता है।लेकिन अगर कोई व्यक्ति ज्यादातर समय एयर कंडीशनर में बिताने लगे, तो शरीर की यही नेचुरल कूलिंग सिस्टम कमजोर होने लगती है। साइंटिस्ट इसे एडेप्टिव कम्फर्टेबल मॉडल कहते हैं। इसका मतलब है कि जिस तापमान में इंसान ज्यादा समय बिताता है, उसका शरीर उसी का आदी हो जाता है
यानी अगर आप हर समय एसी में रहेंगे, तो हल्की गर्मी भी आपको असहनीय लगने लगेगी। यही वजह है कि आज कई लोग थोड़ी देर बिजली जाने पर भी बेचैन होने लगते हैं।शरीर धीरे-धीरे नेचुरल गर्मी झेलने की ताकत खोने लगता है।
डॉक्टरों के अनुसार, एसी का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर को डिहाइड्रेट भी कर सकता है।एयर कंडीशनर कमरे की नमी कम करता है, जिससे त्वचा और शरीर दोनों सूखने लगते हैं।लंबे समय तक एसी में रहने वाले लोगों को ड्राई स्किन, आंखों में जलन और गले में सूखापन जैसी समस्याएं ज्यादा होती हैं।कई लोगों को आंखों में खुजली और धुंधला दिखने की शिकायत भी होने लगती है।
इतना ही नहीं, खराब तरीके से मेंटेन किए गए एसी और बंद कमरों की हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है। इसमें सिरदर्द, चक्कर, थकान, सूखी खांसी, सांस लेने में परेशानी और ध्यान लगाने में दिक्कत जैसी समस्याएं शामिल हैं।रिसर्च में पाया गया है कि जिन लोगों के ऑफिस में प्राकृतिक वेंटिलेशन कम होता है और एसी ज्यादा चलता है, उनमें रेस्पिरेटरी समस्याएं अधिक देखी जाती हैं।

