गर्मियों के मौसम में सूरज की तपिश से घर की छतें और दीवारें आग की तरह तपने लगती हैं।इससे घरों के अंदर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और हमें भारी-भरकम एसी का सहारा लेना पड़ता है।लेकिन अब इस समस्या का एक बेहद आधुनिक समाधान खोज लिया गया है।चीन की साउथईस्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनोखा सीमेंट तैयार किया है, जो खुद को ठंडा रखता है।यह सीमेंट सूरज की रोशनी और गर्मी को सोखता नहीं है, बल्कि उसे वापस अंतरिक्ष में भेज देता है। इसकी मदद से दिन के सबसे गर्म समय में भी इमारत के तापमान को करीब 5.4 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है।
आमतौर पर जो सीमेंट हम घरों में इस्तेमाल करते हैं, वह भारी मात्रा में गर्मी को अपने अंदर जमा कर लेता है।लेकिन इस नए ‘सुपरकूल सीमेंट’ की बनावट अलग है।वैज्ञानिकों ने इसके छोटे कणों की रासायनिक संरचना में बदलाव किया है। इसमें ‘मेटासरफेस इंजीनियरिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।इसकी वजह से यह सीमेंट सूरज की 96.2 प्रतिशत रोशनी को रिफ्लेक्ट यानी वापस बिखेर देता है, जिससे सतह गर्म नहीं हो पाती।
आमतौर पर जो सीमेंट हम घरों में इस्तेमाल करते हैं, वह भारी मात्रा में गर्मी को अपने अंदर जमा कर लेता है। लेकिन इस नए ‘सुपरकूल सीमेंट’ की बनावट अलग है।वैज्ञानिकों ने इसके छोटे कणों की रासायनिक संरचना में बदलाव किया है।इसमें ‘मेटासरफेस इंजीनियरिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से यह सीमेंट सूरज की 96.2 प्रतिशत रोशनी को रिफ्लेक्ट यानी वापस बिखेर देता है, जिससे सतह गर्म नहीं हो पाती।
इस सीमेंट को सिर्फ ठंडा रखने के लिए ही नहीं, बल्कि मजबूती के मामले में भी नंबर वन बनाया गया है। वैज्ञानिकों ने इसके कई कड़े टेस्ट किए हैं।यह सीमेंट एसिड जैसे खतरनाक लिक्विड, अल्ट्रावायलेट किरणों और कड़कड़ाती ठंड के चक्रों को भी आसानी से झेल सकता है।दबाव, खिंचाव और घिसावट के मामलों में भी यह आम सीमेंट से कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुआ है।
इस रिसर्च के राइटर गुओ लू ने बताया कि उन्होंने इस सुपरकूल सीमेंट का टेस्ट असली इमारतों की छतों पर करके देखा है। दोपहर के 1 से 2 बजे के बीच जब बाहर का तापमान 101.1 डिग्री फारेनहाइट (38.4 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच गया, तब इस सीमेंट से बनी छत का तापमान बाकी चीजों से करीब 9.72 डिग्री फारेनहाइट कम रिकॉर्ड किया गया। इसके विपरीत, इसी मौसम में पारंपरिक सीमेंट 59 डिग्री सेल्सियस तक तप जाता है।
यह सीमेंट केवल घरों को ठंडा ही नहीं रखेगा, बल्कि पर्यावरण को बचाने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। मशीन लर्निंग की मदद से किए गए असेसमेंट से पता चला है कि इस सीमेंट के इस्तेमाल से नेट-नेगेटिव कार्बन एमिशन हासिल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि यह हवा से प्रदूषण और कार्बन को कम करने में भी मदद करेगा।
सबसे अच्छी बात यह है कि इस जादुई सीमेंट को बनाने की प्रक्रिया बहुत महंगी नहीं है। इसे बड़े पैमाने पर आसानी से फैक्ट्रियों में बनाया जा सकता है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका उपयोग घरों की छतों, दीवारों और बाहरी कोटिंग में बहुत आराम से किया जा सकता है। शहरों में इस सीमेंट के इस्तेमाल से भारी मात्रा में बिजली की बचत होगी, क्योंकि लोगों को घरों में एयर कंडीशनर चलाने की जरूरत बहुत कम पड़ेगी।

