- बीरेंद्र कुमार झा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इस बार कुर्सी फेंकने की कोशिश हुई। कुर्सी की एक टांग मुख्यमंत्री के चेहरे के पास से गुजरती हुई सुरक्षाकर्मी के हाथ में आई। समाधान यात्रा के दौरान औरंगाबाद में सोमवार शाम यह घटी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर फेंकी कुर्सी, औरंगाबाद में समाधान यात्रा के दौरान चेहर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इस बार कुर्सी फेंकने की कोशिश हुई। कुर्सी की एक टांग मुख्यमंत्री के चेहरे के पास से गुजरती हुई सुरक्षाकर्मी के हाथ में आई। समाधान यात्रा के दौरान औरंगाबाद में सोमवार शाम यह घटना हुई।
मुख्यमंत्री का अगला कदम पड़ गया होता तो चेहरे पर लग जाता कुर्सी का यह टुकड़ा।
मुख्यमंत्री का अगला कदम पड़ गया होता तो चेहरे पर लग जाता
समाधान यात्रा के दौरान नीतीश कुमार पर फेंकी गई कुर्सी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इस बार कुर्सी फेंकने की कोशिश हुई। कुर्सी की एक टांग मुख्यमंत्री के चेहरे के पास से गुजरती हुई सुरक्षाकर्मी के हाथ में आई। समाधान यात्रा के दौरान औरंगाबाद में सोमवार शाम यह घटना हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कुर्सी फेंके जाने की जानकारी मंच से भी दी गई, लेकिन कोई भी उस कुर्सी फेंकने वाले को पहचान नहीं सका । प्लास्टिक कुर्सी का यह टुकड़ा एक पल भी बाद आता तो आगे बढ़ रहे मुख्यमंत्री के चेहरे पर ही लगता। चारों तरफ सुरक्षाकर्मियों से घिरे मुख्यमंत्री पर यह टुकड़ा भारी भीड़ और समर्थकों की नारेबाजी के बीच फेंका गया। ड्रोन मॉनीटरिंग की स्थिति में ही फेंकने वाले की पहचान हो सकती है, लेकिन बताया जा रहा है कि यहां पर ड्रोन कैमरा नहीं था।
सीतामढ़ी में समाधान यात्रा के दौरान एक युवक ने किया था आत्मदाह का प्रयास
मुख्यमंत्री के समाधान यात्रा के दौरान लोगों का उत्तेजक हो जाना कोई नई घटना नहीं है।इस घटना से पूर्वी सीतामढ़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समाधान यात्रा के दौरान एक युवक ने अपने शरीर पर किरोसिन तेल छिड़ककर आग लगाकर आत्मदाह करने का प्रयास किया था।
उत्तेजना पूर्ण घटनाओं के पीछे का तर्क
नीतीश कुमार के समाधान यात्रा के दौरान इन दोनो घटनाओं में उत्तेजना के अलावा और कोई साम्यता नजर नहीं आती है। उल्टे इसमें एक बड़ी विषमता यह नजर आती है कि सीतामढ़ी की घटना में युवक खुद आत्मदाह करना चाह रहा था जबकि औरंगाबाद की घटना में जिसने भी कुर्सी फेंकी वह नीतीश कुमार को चोट पहुंचाना चाह रहा था। लेकिन इस विषमता के बावजूद नीतीश कुमार के समाधान यात्रा में घटने वाली घटनाएं इस बात की तरफ इशारा कर रही है कि हर चाहत रखने वाले व्यक्ति को सीधे नीतीश कुमार से मिलने नहीं दिया जाता है ,बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों को ही उनसे मिलाया जाता है।ऐसे में जब लोगों को लगता है कि उनकी समस्या का समाधान नीतीश कुमार के समाधान यात्रा के बावजूद भी नहीं हो पाएगा तो ऐसी घटनाओं को उत्तेजना की अवस्था में अंजाम दे देता है।

