बीरेंद्र कुमार झा
भारत और कनाडा के बीच तनाव की स्थिति लगातार बनी हुई है। खालिस्तान के समर्थन को लेकर प्रधानमंत्री जस्टिन टुडो की जमकर आलोचना हो रही है। इस बीच तमाम तरह के एक्शन और रिएक्शन का दौर चल रहा है। कनाडा में कार्रवाई से भारतीय छात्र समुदाय और उसके पेरेंट्स के बीच चिंता का दौर है। इन सारी बातों के बीच भारत के हाथ में कनाडा की वह कमजोर नब्ज है, जिस पर चोट कनाडा के लिए बहुत बड़ी मुश्किल कर देगी।कनाडा की यह कमजोरी है- उसकी इकोनामी का अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर निर्भर होना ।इसमें भी भारतीय छात्रों की संख्या अच्छी खासी है, जो मोटी फीस के रूप में यहां के प्राइवेट यूनिवर्सिटी की बड़ी आर्थिक मदद करते हैं।
कनाडा के लिए ऐसी बढ़ेगी मुश्किल
भारत को इस बात का अंदाजा है कि कनाडा के मामले में वह कड़े कदम उठाने की हालत में है। इस मामले में अगर भारत ने फैसला लिया तो कनाडा की सांस बंद हो जाएगी। अगर दोनों देशों के संबंध ज्यादा खराब होते हैं, तो भारत अपने यहां से छात्रों के कनाडा जाने पर प्रतिबंध लगा सकता है। जानकारी के मुताबिक ऐसा होते ही कनाडा की ऐसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी जिन्हें सरकार से मदद नहीं मिलती है खत्म हो सकती है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक हर साल अंतरराष्ट्रीय छात्र कनाडा की इकोनॉमी में 30 बिलियन डॉलर का योगदान करते हैं। अगर भारत ने अपने छात्रों पर प्रतिबंध लगाया तो इस सेक्टर के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। इतना ही नहीं लाखों की संख्या में रहने वाले भारतीय छात्र वहां पर किराए के रूप में मॉर्टगेज के रूप में बड़ा योगदान करते हैं।
भारतीय छात्रों पर प्रतिबंध लगे तो क्या होगा कनाडा का हाल
कनाडा के ऑडिटर जनरल बोनी – लिसिक पैसे के मामले में अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर निर्भरता के खतरे गिना चुके हैं।2021 के रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि यह सरकार के नियंत्रण से बाहर है।रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कुछ देशों की छात्रा कनाडा में प्रवेश करने में असमर्थ होते हैं, तो राजस्व को अचानक और बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। ऐसे में अगर एक देश है अपने छात्रों को यहां आने से रोक दे जिसके छात्रों का हिस्सा 40% से अधिक है तो क्या होगा इसका अंजाम इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।कनाडा सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2022 में कनाडा में 5.5 0लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से 2.5 6लाख छात्र भारत से थे और 3.5 लाख भारतीय छात्र वीजा पर कनाडा में रह रहे थे और इसकी अर्थव्यवस्था में मदद कर रहे थे। यह भी ध्यान देने वाली बात है की अर्थव्यवस्था में उनका योगदान उन्हें मिली नौकरियों के माध्यम से उनकी कमाई से कहीं अधिक है।
भारतीय छात्रों की संख्या
हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय आर्टिकल में भी इस बात को लेकर चिंता जताई गई थी।इसमें लिखा गया था कि भारत और कनाडा के बीच भारतीय तनाव के चलते वहां रहने वाले भारतीय छात्रों की संख्या कम हो सकती है। कनाडा की सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक यहां आने वाले कुल आठ लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से 40 प्रतिसत भारतीय हैं। प्राइवेट कनाडाई छात्र जितने फीस देते हैं ,भारतीय छात्र उसका 3 से 5 गुना ज्यादा फीस देते हैं ।अगर देखा जाए तो कनाडा के निजी यूनिवर्सिटी का इकोसिस्टम ही पूरी तरह से भारतीय छात्रों पर निर्भर है। अगर भारत अपने छात्रों के कनाडा जाने पर रोक लगाती है तो फिर यह पूरी तरह से कॉलेप्स कर जाएगा।
भारतीय छात्रों को भारत सरकार पर भरोसा
कनाडा की कदम के बाद जो छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं, उनके पैरेंट्स के बीच काफी चिंता है। इसके अलावा चिंता का कुछ ऐसा ही आलम वहां पर रहने वाले छात्रों के बीच भी है, हालांकि ये छात्र भारत के द्वारा उठाए गए कदम से पूरी तरह से सहमत है।ब्राम्पटन में रहने वाले एक छात्रा ने बताया कि भारतीय छात्र समुदाय में इस समय खालिस्तानी धमकियां और इस पर टुडो के स्टैंड की ही चर्चा है। लुधियाना का यह छात्र फिलहाल वर्क परमिट पर कनाडा में है और परमानेंट रेजिडेंस के लिए इंतजार कर रहा है।इस छात्र के मन में भी कनाडा के हालात को लेकर चिंता है,लेकिन वह भारत के बढ़ते कदम और हालिया रेस्क्यू ऑपरेशंस को देखते हुए कॉन्फिडेंट है।उसने कहा कि भारत ने हाल ही में यूक्रेन की वार जॉन से छात्रों का रेस्क्यू किया था ।सरकार बैठी है,हमें उन पर पूरा भरोसा है।

