भारत में वे लोग तेजी से सोलर सिस्टम अपना रहे हैं, जिनके पास छत या पैनल लगाने के लिए अच्छी-खासी जगह हैं। हालांकि भारत में ऐसे कई शहर हैं, जहां छत सबके पास नहीं होती और ये लोग सोलर के फायदों से महरूम रह जाते हैं। इस समस्या का समाधान एक पिता और बेटे की जोड़ी ने खोज निकाला है। दरअसल भोपाल के पूर्व माइनिंग इंजीनियर प्रदीप कुमार जैन और उनके बेटे ने एक ऐसा फोल्डेबल बालकनी सोलर सिस्टम तैयार किया है, जो बेहद कम जगह में 1 से 3.5 किलोवाट तक बिजली जनरेट कर सकता है।
इस सिस्टम में 360-डिग्री बाईफेशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। इसकी खासियत है कि इसे बिजली विभाग से बिना किसी अनुमति के सीधे प्लग में लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
किसी भी अपार्टमेंट की बालकमी में धूप अक्सर एक ही दिशा से आती है। इसकी वजह से साधारण सोलर पैनल पूरी क्षमता से बिजली नहीं बना पाते। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रदीप कुमार जैन और उनकी टीम ने अपने सेटअप में 615 वॉट के आधुनिक बाईफेशियल ग्लास पैनल्स लगाए हैं।
इसका खास माउंटिंग फ्रेम दिन में बालकनी से बाहर की ओर लटक जाता है। इससे पैनल पर सामने की ओर सीधी धूप और पिछले हिस्से पर आस-पास से टकराकर आने वाली रोशनी और गर्मी पड़ती है। इतना ही नहीं अपने सिस्टम में इन्होंने धूप को ठीक से पकड़ने के लिए खास रिफ्लेक्टर जोड़े हैं. जो रोशनी को पैनल के पिछले हिस्से पर फोकस करते हैं।
इससे जगह सीमित होने के बाद भी पैनल की क्षमता 15% तक बढ़ जाती है। रात के समय इसी स्ट्रक्चर को आसानी से अंदर मोड़कर बालकनी के मजबूत सुरक्षा गेट में तब्दील किया जा सकता है।
प्रदीप कुमार जैन और उनके बटे सिद्धांत जैन ने अपने इस सिस्टम को बालकनी की दीवार पर मजबूती से बनाए रखने के लिए 5-टन वजन उठाने की क्षमता वाले हेवी-ड्यूटी फास्टनर्स का इस्तेमाल किया है।
इसके अलावा पैनल के फ्रेम को हेवी-इंडस्ट्री मानकों पर फैब्रिकेट किया गया है, ताकि तेज हवाओं और झटकों में भी पैनल का संतुलन न बिगड़े।
हमसे खास बातचीत में सिद्धांत जैन ने बताया कि भोपाल में हाल ही में आए तेज आंधी-तूफान में 100 से ज्यादा बड़े पेड़ उखड़ गए थे लेकिन उनका सिस्टम बिना किसी नुकसान के मजबूती से डटा रहा था।
बाप-बेटे की इस जोड़ी द्वारा बनाए गए सोलर सिस्टम की खूबी इसका ऑफ-ग्रिड आर्किटेक्चर है। इसका मतलब है कि यह सेटअप पावर ग्रिड से कनेक्ट नहीं होता, जिसकी वजह से बिजली विभाग से कोई मंजूरी नहीं लेनी पड़ती।
इसकी वायरिंग किसी भी आम इनवर्टर जितनी आसान है। एनर्जी मैनेजमेंट के लिए इसे फुजियामा ऑफ-ग्रिड सिस्टम पर चलाया जाता है, जिसमें इनबिल्ट लिथियम-आयन बैटरी और सोलर MPPT यानी मैक्सिमम पावर पॉइंट ट्रैकिंग कंट्रोलर मिलता है।
सिद्धांत के अनुसार इस कंट्रोलर की खूबा है कि यह धूप के हिसाब से ज्यादा पावर खींचता है और पावर कट होते ही बिना रुकावट बैकअप शुरू कर देता है।
इस खास किस्म के सोलर सिस्टम और बैटरी यूनिट का पूरा खर्च 55 हजार रुपये आता है, जो कि रोजाना 1 से 3.5 किलोवाट तक बिजली पैदा करता है। साल भर में इससे 550 से 700 यूनिट बिजली बनाई जा सकती है।

