दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

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हम अक्सर दिल को सिर्फ एक पंप के रूप में जानते हैं, जो दिन-रात बिना रुके खून को पूरे शरीर में पहुंचाता रहता है।एक सामान्य इंसान का दिल रोज लगभग 1 लाख बार धड़कता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों की नई खोज में कुछ अलग सामने आया है। नए शोध के मुताबिक, दिल की ये लगातार धड़कन सिर्फ लाइफ को बनाए रखने का काम नहीं करती, बल्कि यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी बचाव कर सकती है।

यह सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन यह सच है कि दिल में कैंसर होना बहुत ही कम देखने को मिलता है, जबकि शरीर के दूसरे अंगों में कैंसर आम है, दिल किसी तरह इससे बचा रहता है।वैज्ञानिक लंबे समय से इस रहस्य को समझने की कोशिश कर रहे थे और अब उन्हें इसका एक बड़ा कारण मिल गया है।

दिल के सेल्स बहुत कम बनते और बदलते हैं। आमतौर पर जहां सेल्स तेजी से बनते हैं, वहां कैंसर का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन दिल में ऐसा नहीं होता है।इसके बावजूद दिल में कैंसर न होना एक बड़ा सवाल था।अब वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कारण दिल की लगातार चलने वाली मेहनत और दबाव हो सकता है। दिल हर समय खून को पंप करता है, जिससे उसमें एक खास तरह का मैकेनिकल दबाव (mechanical stress) बनता है। यह दबाव कैंसर कोशिकाओं (cells) को बढ़ने से रोक सकता है। नई स्टडी में यह सामने आया कि दिल की लगातार हरकत कैंसर कोशिकाओं के व्यवहार को बदल देती है, जिससे वे तेजी से बढ़ नहीं पाती हैं।
वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझने के लिए चूहों पर एक अनोखा प्रयोग किया।उन्होंने एक दिल को चूहे की गर्दन में ट्रांसप्लांट किया।इस ट्रांसप्लांट किए गए दिल में खून तो पहुंच रहा था, लेकिन वह सामान्य दिल की तरह मेहनत नहीं कर रहा था यानी उसमें धड़कन का दबाव कम था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने दोनों दिलों में कैंसर सेल्स डाले. जिसमें एक सामान्य, धड़कता हुआ दिल था और दूसरा कम दबाव वाला ट्रांसप्लांट किया गया दिल था। इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे। जो दिल सामान्य तरीके से धड़क रहा था, उसमें कैंसर सेल्स नहीं बढ़ पाए, लेकिन जो दिल कम दबाव में था, उसमें ट्यूमर आसानी से बनने लगे।इससे साफ हो गया कि दिल की धड़कन खुद कैंसर के खिलाफ एक रक्षा प्रणाली की तरह काम करती है।

वैज्ञानिकों ने आगे पाया कि यह सिर्फ बाहर का दबाव नहीं है, बल्कि यह कोशिकाओं के अंदर जाकर उनके जीन (genes) को भी प्रभावित करता है।इस प्रक्रिया में एक खास प्रोटीन नेसप्रिन-2 (Nesprin-2) अहम भूमिका निभाता है।यह प्रोटीन बाहरी दबाव को कोशिका के केंद्र (न्यूक्लियस) तक पहुंचाता है।वहां यह जीन की गतिविधियों को बदल देता है। जब यह प्रोटीन सही से काम करता है, तो कैंसर से जुड़े जीन धीमे पड़ जाते हैं और कोशिकाएं बढ़ नहीं पाती हैं। जब वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन को बंद कर दिया, तो स्थिति बदल गई।कैंसर कोशिकाएं फिर से तेजी से बढ़ने लगीं. यहां तक कि धड़कते दिल में भी ट्यूमर बनने लगे।इससे साबित हुआ कि यह पूरा सिस्टम एक सक्रिय रक्षा तंत्र है।

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