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मणिपुर में कैसे हैं हालात, हिंसा के क्षेत्र से 23000 लोगों को बाहर निकाला गया

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बीरेंद्र कुमार झा

मणिपुर के हिंसा प्रभावित हिस्सों में रविवार को कर्फ्यू में कुछ घंटों की ढील दी गई, जिसके बाद आम जनजीवन पटरी पर लौटता दिखाई दिया वहीं सेना के ड्रोन और हेलीकॉप्टर हवा में गस्त लगाकर क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सेना के जवानों ने अब तक हिंसा प्रभावित इलाकों से करीब 23 हजार लोगों को बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित सैनिक छावनी में स्थानांतरित किया है। मालूम हो कि हिंसा में 54 से अधिक लोगों की मौत हो गई है।

गृह मंत्री अमित शाह लगातार स्थिति की कर रहे हैं समीक्षा

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि मणिपुर में हिंसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हिंसा दो जातियों के बीच हो रही है। हम उनसे बात कर रहे हैं राज्य सरकार द्वारा आज 3 घंटे के लिए कर्फ्यू हटा लिया गया। स्थिति नियंत्रण में है, और हम क्षेत्र में शांति की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। हिंसा से कुछ हासिल नहीं हो सकता। मैं लोगों से आगे आने और शांति से मुद्दों को हल करने का आग्रह करता हूं। केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने कहा कि मणिपुर में स्थिति नियंत्रण में है और उसको संभालने के लिए प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से वहां उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।

सुबह कर्फ्यू में दी गई ढील

रविवार को मणिपुर के हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर इलाके में सुबह 7:00 से 10:00 के बीच कर्फ्यू में ढील दी गई। इस दौरान खाद्य पदार्थ दवाइयां और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए लोग बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकले।अधिकारियों के मुताबिक सुबह 10:00 बजे कर्फ्यू में ढील की मियाद खत्म होने के बाद सेना और असम राइफल्स के जवानों ने शहर में फ्लैग मार्च किया।हिंसा प्रभावित राज्य में सेना के 120 से 125 कॉलम की तैनाती की गई है। मणिपुर में अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय पुलिस बलों के करीब 10 हजार जवानों को भी तैनात किया गया है।

मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा

गौरतलब है कि मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय द्वारा उसे अनुसूचित जनजाति एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर की ओर से आयोजित आदिवासी एकता मार्च के दौरान चुराचंदपुर जिले के पूर्व क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। नागा और कुकी सहित आदिवासी समुदायों की ओर से इस मार्च का आयोजन मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा पिछले महीने राज्य सरकार को मेइती समुदाय को एसटी दर्जे की मांग पर 4 सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का निर्देश देने के बाद किया गया था। पुलिस के मुताबिक तोरबंग में मार्च के दौरान हथियार थामे लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर मेइती समुदाय के सदस्यों पर हमला किया। मेइती समुदाय के लोगों ने भी जवाबी हमले किए, जिससे पूरे राज्य में हिंसा फैल गई।

मणिपुर की कुल आबादी में मेइती समुदाय की 53 फ़ीसदी हिस्सेदारी

एक अनुमान के अनुसार मणिपुर की कुल आबादी में मेइती समुदाय की 53 फ़ीसदी हिस्सेदारी है। इस समुदाय के लोग मुख्यत: इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं नागा और कुकी सहित अन्य आदिवासियों की आबादी 40 फीसदी के करीब है तथा ये इंफाल घाटी के आसपास स्थित पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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