नई दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों और सिख संगठनों से जुड़े नेताओं ने कांग्रेस नेताओं के कथित बयानों के खिलाफ शनिवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को ‘नायक’ या ‘रोल मॉडल’ बताए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई और कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलोन ने किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में नाम आने वाले किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की टिप्पणी पीड़ित परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
विवाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के 21 अगस्त के कथित बयान के बाद तेज हुआ, जिसमें उन्होंने सज्जन कुमार को ‘रोल मॉडल’ के तौर पर पेश किया। बयान सामने आने के बाद सिख संगठनों और दंगा पीड़ित परिवारों में नाराजगी बढ़ गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी से 1984 की हिंसा में प्रभावित परिवारों के पुराने जख्म फिर से ताजा हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस से बयान पर स्पष्टीकरण देने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
सज्जन कुमार से जुड़े मामले में क्या हुआ था?
सज्जन कुमार का नाम 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में सामने आया था। दिल्ली कैंट के राज नगर इलाके में पांच लोगों की हत्या से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले में बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी कार्यवाही हुई। इस वजह से 1984 की हिंसा से जुड़े पीड़ित परिवार और सिख संगठन सज्जन कुमार के नाम को लेकर लंबे समय से संवेदनशीलता जताते रहे हैं।
1984 की हिंसा में हजारों परिवार हुए प्रभावित
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों परिवार प्रभावित हुए। पीड़ित परिवार लंबे समय से न्याय, मुआवजे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
राहुल गांधी के आवास के बाहर प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास की ओर जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और बैरिकेडिंग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस से कथित टिप्पणियों पर जवाबदेही तय करने के साथ-साथ सार्वजनिक माफी की मांग की। सिख नेताओं का कहना है कि 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों पर राजनीतिक बयानबाजी करते समय पीड़ित परिवारों की भावनाओं और न्याय की प्रक्रिया का ध्यान रखा जाना चाहिए।

