इस समय हमारे देश में नागरिकता का मुद्दा पूरा गर्माया हुआ है। सबसे पहले आधार को नागरिकता से मुक्त किया गया और किसी व्यक्ति के द्वारा पैन कार्ड बनवाने के लिए उसे व्यक्ति के पता बताने के लिए आधार कार्ड को अनुप्रयुक्त कर दिया गया और इसकी जगह पर दूसरे कागजात जमा करने की बात कही गई। अब पासपोर्ट जिससे विदेश में कोई व्यक्ति अपने आप को भारतीय नागरिक बताता था उसे नागरिकता का आधार मानने पर रोक लगा दी गई। अभी देश भर में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण के दौरान भी आधार कार्ड के रहते हुए भी लाखों लाख लोगों के नाम यह कहते हुए काट दिया गया कि वह भारतीय नागरिक नहीं है और उन्हें आधार की जगह अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आधार कार्ड वैध बताया लेकिन उसके बावजूद जमीनी स्तर पर चुनाव आयोग से जुड़े व्यक्ति लोगों के पास आधार कार्ड रहने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटाते रहे। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि देश का नागरिक है कौन और इतनी बड़ी संख्या में जिन लोगों के नाम इस आधार पर मतदाता सूची से विलोपित कर दिए गए वह देश के नागरिक नहीं हैं, उनका क्या होगा? सबसे पहले जानते हैं कि भारतीय नागरिक होते कौन हैं ?
भारत में नागरिकता मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) और भारतीय संविधान के नियमों द्वारा तय की जाती है。 इसके तहत किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए कानूनन 5 तरीके दिए गए हैं—जन्म से, वंश (परंपरा) द्वारा, पंजीकरण द्वारा, देशीकरण (प्राकृतिककरण), और किसी नए क्षेत्र के भारत में विलय द्वारा。1. जन्म से (By Birth):26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक है。1 जुलाई 1987 या उसके बाद भारत में जन्मे किसी बच्चे को तभी नागरिकता मिलती है, जब उसके माता-पिता में से कम से कम एक जन्म के समय भारतीय नागरिक हो。3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्मे बच्चों के लिए यह अनिवार्य है कि माता-पिता में से कोई एक भारतीय हो और दूसरा अवैध प्रवासी (illegal immigrant) न हो。2. वंश (By Descent):यदि आपका जन्म 26 जनवरी 1950 के बाद लेकिन 10 दिसंबर 1992 से पहले भारत के बाहर हुआ है और आपके पिता जन्म के समय भारतीय थे, तो आपको भारत का नागरिक माना जाएगा。10 दिसंबर 1992 के बाद विदेशों में जन्मे बच्चों के लिए, माता या पिता में से कोई एक जन्म के समय भारत का नागरिक होना चाहिए。3. पंजीकरण द्वारा (By Registration):भारतीय मूल के वे व्यक्ति जो भारत में सात साल (पहले निवास करने की अवधि) से रह रहे हों。ऐसे विदेशी नागरिक जिन्होंने किसी भारतीय नागरिक से विवाह किया हो。4. देशीकरण द्वारा (By Naturalization):कोई भी विदेशी नागरिक जो पिछले 12 महीनों से लगातार भारत में रह रहा हो और पिछले 14 वर्षों में से कम से कम 11 वर्षों तक भारत में सामान्य निवासी रहा हो, वह नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है。अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों के लिए यह 11 साल की अवधि घटाकर 6 वर्ष की गई है。5. क्षेत्र के विलय द्वारा:यदि कोई नया क्षेत्र या भू-भाग भारत का हिस्सा बनता है (जैसे पहले सिक्किम बना था), तो भारत सरकार उस क्षेत्र के लोगों को भारतीय नागरिक घोषित कर सकती है。नागरिकता का प्रमाण (Proof of Citizenship):कानूनन नागरिकता कोई सिंगल कार्ड या दस्तावेज नहीं है, लेकिन इसे साबित करने के लिए मान्य प्रमुख दस्तावेजों में भारतीय पासपोर्ट, वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया जाता है。
संविधान में नागरिकता से जुड़े अनुच्छेद (अनुच्छेद 5-11)अनुच्छेद 5: संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) भारत में अधिवास (domicile) रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नागरिकता दी गई।अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत आए व्यक्तियों के लिए नागरिकता के नियम।अनुच्छेद 7: भारत से पाकिस्तान गए लेकिन बाद में लौट आए लोगों के लिए नागरिकता।अनुच्छेद 8: भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के लोगों (PIO) के नागरिकता के अधिकार।अनुच्छेद 9: यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाएगी (एकल नागरिकता का नियम)।अनुच्छेद 10: नागरिकता के अधिकारों का बना रहना (संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अधीन)।अनुच्छेद 11: नागरिकता के अर्जन (प्राप्त करने) और समाप्ति (त्यागने) का कानून बनाने की पूर्ण शक्ति संसद के पास होगी।
अब चर्चा वैसे लोगों की जिनके नाम को मतदाता सूची से विलोपित कर दिया गया उनकी। क्या इतनी बड़ी संख्या में मौजूद लोग भारतीय नागरिक नहीं है, सभी के सभी जैसा कि भारतीय जनता पार्टी कहती है उस हिसाब से घुसपैठिया हैं।
दरअसल यह सब गड़बड़ झाला इसलिए हो रहा है क्योंकि अभी तक हमारे देश में लोगों के ऊपर ही यह जिम्मेदारी थोपी जा रही है, की वे ही इस बात को सत्यापित करें कि वह भारतीय नागरिक हैं। चुनाव आयोग के पदाधिकारी जो मनमानी ढंग से कई वैध नागरिकों के नाम को भी मतदाता सूची से विलोपित कर देते हैं उन्हें दंड देने का कोई प्रावधान अभी तक नहीं है। गौरतलब है कि मतदाता सूची से नाम विलोपित करने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को भारतीय नागरिक मानते हुए उनका नाम बाद में मतदाता सूची में जोड़ा गया। सिर्फ नागरिकता से जुड़ा यह मामला ही नहीं, बल्कि अन्य मामलों में भी लोगों को ही दोषी माना जाता है और सरकारी पदाधिकारी को इसमें बिल्कुल निर्दोष माना जाता है। मामला की सत्यता सिद्ध होने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
कायदे से तो नागरिकता प्राप्ति के अन्य तरीके को छोड़ दें और सिर्फ जन्म के आधार पर और वंश के आधार पर दी जाने वाली नागरिकता की ही बात करें तो भारत सरकार के पास किसी भी शिशु के जन्म लेने का पूरा आंकड़ा मौजूद रहता है। इसके लिए उसके पास वरीय पदाधिकारी से लेकर आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका की एक बड़ी फौज रहती है,जिसके वेतन और मानदेय के रूप में सरकारी खजाने से भारी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में अगर भारत में जन्म लेने वाला कोई भी बालक अगर भारतीय नागरिकता से वंचित रह जाता है, तो क्या यह जिम्मेदारी भारत सरकार और उसके तमाम पदाधिकारी और कर्मचारियों की नहीं बनती है कि वह समय पर भारत में जन्म लेने वालों को उसके नागरिकता से संबंधित प्रमाण पत्र उन्हें दिन और इसका आंकड़ा रखें। और क्या इसका उल्लंघन होने पर उनके लिए दंड का प्रावधान नहीं होना चाहिए ? अगर अगर इन अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके लिए दोषी माना जाएगा और दंडित करने का प्रावधान लाया जाएगा तो निश्चय ही नागरिकता से संबंधित जो भी संगतिया इस समय सामने आ रही है,सिर्फ वह ही नहीं अन्य सभी गड़बड़ झाला भी स्वत समाप्त हो जाएगा। भारतीय नागरिक को जो भी संविधान प्रदत्त या कानून प्रदत्त अधिकार है ,वह उन्हें मिलना ही चाहिए,चाहे वह नागरिकता का हो,चाहे मतदाता सूची में नामांकन का हो, चाहे राशन कार्ड का हो या अन्य सरकारी सुविधा प्राप्त करने का हो, क्योंकि वह उसका अधिकार है और अगर किसी सरकारी पदाधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही से वह इसे प्राप्त करने से वंचित रहता है,तो ऐसे सरकारी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए उन्हें दंडित करने के लिए संसद से एक कड़ा कानून बनाया जाना चाहिए। रही बात बात इसमें गड़बड़ झाला कर नाजायज व्यक्ति के द्वारा ऐसी सुविधा प्राप्त करने की है तो इसके लिए भी सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारी ही जिम्मेदार होते हैं, बिना भ्रष्टाचार के लिए उनकी मिली भगत के कोई गड़बड़ झाला हो ही नहीं सकता है। हां ऐसे मामले में सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारियों के साथ-साथ गड़बड़ झाला करने वाले व्यक्तियों के लिए भी कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए।

