तंबाकू का सेवन दुनिया भर में हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग धूम्रपान और तंबाकू से जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं।चिंता की बात यह है कि तंबाकू से होने वाले नुकसान केवल लंग्स या हार्ट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ओरल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि मुंह में दिखने वाले कुछ सामान्य से लगने वाले संकेत कई बार कैंसर की शुरुआती चेतावनी साबित हो सकते हैं, लेकिन लोग अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
डॉ. अमित चक्रवर्ती के अनुसार देश में ओरल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके प्रति जागरूकता अभी भी काफी कम है।कई लोग मुंह के छालों, मसूड़ों से खून आने या मुंह के भीतर होने वाली अन्य समस्याओं को सामान्य समझकर टाल देते हैं।जबकि अगर कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक नहीं होता है, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।ऐसे लक्षण ओरल कैंसर से जुड़े हो सकते हैं और समय पर जांच न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
एक्सपर्ट बताते हैं कि केवल छाले ही नहीं, बल्कि मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखना, चबाने में दर्द होना, किसी तरह की गांठ या सूजन महसूस होना, दांतों का ढीला पड़ना, बोलने या निगलने में परेशानी होना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा लगातार मुंह से दुर्गंध आना या मुंह के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस होना भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।खासतौर पर तंबाकू का सेवन करने वालों में ऐसे लक्षण अधिक देखने को मिल सकते हैं।
डॉ. अमित चक्रवर्ती का कहना है कि हर मुंह का छाला कैंसर नहीं होता। सामान्य छाले आमतौर पर तीन से चार दिनों में ठीक हो जाते हैं और उनमें ज्यादा परेशानी नहीं होती है,लेकिन यदि छाला लगातार बढ़ रहा हो, दर्द दे रहा हो, आसानी से खून निकल रहा हो या खाने-पीने और बोलने में दिक्कत पैदा कर रहा हो, तो तुरंत एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।यदि उसके साथ सफेद या लाल धब्बे भी दिखाई दें तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
पहले ओरल कैंसर मुख्य रूप से 50 से 75 वर्ष की उम्र के लोगों में देखा जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है। अब 25 से 45 वर्ष की उम्र के युवा धूम्रपान करने वालों और वेपिंग करने वालों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि धूम्रपान, तंबाकू चबाना, वेपिंग, शराब का सेवन और खराब ओरल हेल्थ इस खतरे को बढ़ा रहे हैं।
अगर इसके इलाज की बात करें, तो ओरल कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इलाज के परिणाम काफी बेहतर हो सकते हैं। डॉ. अमित चक्रवर्ती के अनुसार शुरुआती अवस्था में इलाज कराने वाले मरीजों के बचने की संभावना 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है।

