क्या कुछ राज्यों में बदले जायेंगे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ?

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अखिलेश अखिल
जैसे ही बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा को करीब डेढ़ साल के लिए सेवा विस्तार दिया ,कई प्रदेशों के अध्यक्षों के बदले जाने की सम्भावना बढ़ गई है। माना जा रहा है कि सबसे पहले झारखंड और बिहार में प्रदेश अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। झारखंड में पहले हेमंत सर्कार को गिराने की कवायद शुरू की गई जो संभव नहीं हो सका। अब बीजेपी मान रही है कि ऑपरेशन कमल की जगह पार्टी अध्यक्ष में बदलाव कर पार्टी को सूबे में मजबूत किया जाए ताकि लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम मिले और फिर विधान सभा चुनाव में बीजेपी की वापसी की जाए। उम्मीद की जा रही है बीजेपी झारखंड में कोई आदिवासी अध्यक्ष की नियुक्ति करेगी। कई आदिवासी नेता इस रेस में हैं लेकिन नड्डा किसे चुनते हैं इसे देखना होगा।

उधर बिहार में भी नए अध्यक्ष चुने जाने की सम्भावना है। बीजेपी ने बिहार में विधान सभा और विधान परिषद् में तो नेता की नियुक्ति कर दी है लेकिन अध्यक्ष की नियुक्ति अभी तक नहीं हो पायी है। जदयू के बीजेपी से सम्बन्ध तोड़ने के बाद उम्मीद की जा रही है कि नड्डा बिहार में अध्यक्ष को बदलेंगे ताकि आगामी लोक सभा चुनाव में पार्टी को लाभ हो सके। बीजेपी की नजर किसी भी सूरत में बिहार में अपनी ताकत को बनाये रखने की चुनौती है। महागठबंधन की राजनीति जिस तरह से बीजेपी को घेरने की हो रही है ऐसे में किसी जातिगत नेता पर दाव लगा सकती है।

दिल्ली में हलाकि कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति बीजेपी कर चुकी है लेकिन खबर है कि नए अध्यक्ष की सम्भावना यहाँ भी बनी हुई है। इसी तरह से गुजरात में भी नए अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। मौजूदा अध्यक्ष सी आर पाटिल अगर केंद्र की राजनीति में आते हैं तो गुजरात को भी नया पार्टी अध्यक्ष मिल सकता है।

बीजेपी राजस्थान और कर्नाटक में अध्यक्ष बदले जाने की बात कहती रही है। वहाँ क्या होता है इसपर अभी कोई खबर नहीं है। कर्नाटक में अध्यक्ष बदले जाने की सम्भावना कम ही है क्योंकि वहाँ मई में चुनाव होने हैं। लेकिन राजस्थान में नए अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में भी अब शायद ही अध्यक्ष बदले जाए। खबर है कि  मध्यप्रदेश में संगठन के भीतर कुछ और ताकतवर लोगों को लागग्या जाएगा ताकि लोकसभा चुनाव के साथ ही विधान सभा चुनाव में पार्टी को लाभ मिल सके। मध्यप्रदेश चुनाव बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती वाली है। कांग्रेस भी पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है और शिवराज के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी का माहौल भी है। ऐसे में बीजेपी वहाँ अभी कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती। 

कर्नाटक और उससे पहले पूर्वोत्तर राज्यों के चुनाव होने हैं। बीजेपी इस राज्यों में सत्ता में वापसी की जोड़दार तैयारी कर रही है। बीजेपी चाहती है कि जिन दस राज्यों में चुनाव होने हैं ,सभी राज्यों में उसकी  जीत हो।


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