आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आरक्षण पर JDU के अंदर सियासी बवाल

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पटना (बीरेंद्र कुमार): आरक्षण को लेकर सबसे ज्यादा सियासत बिहार में होती है। आरक्षण को लेकर ताजा मामला उपेंद्र कुशवाहा के बयान को लेकर सामने आया है। आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के मसले पर बड़ा बयान देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि पचास प्रतिशत की सीमा ईडब्ल्यूएस वाले इस आरक्षण से टूट गई है। उन्होंने आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि अभी तक मात्र 10 प्रतिशत आरक्षण ही जातीय आधार पर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें सबको शामिल किया जाता हो ,ऐसी बात नहीं है। पार्टी सामान्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10% आरक्षण देने के मुद्दे पर बंटी हुई दिखाई दे रही है।

उपेंद्र कुशवाहा का विवादित बयान

जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सामान्य वर्ग को दिए गए 10% कोटा को आर्थिक आधार पर आधारित होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण दिया गया है। यह बात सच नहीं है। यदि आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण का यह लाभ प्रदान किया जाता,तो दलित वर्ग के आर्थिक रूप से गरीब लोगों को भी यह सुविधा प्राप्त होती।लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि इस आरक्षण को जातियों के आधार पर प्रदान किया गया है। उन्होंने इस आधार पर 50% आरक्षण के कोटा की सीमा को हटाने की मांग करते हुए कहा कि हम अब कोटा सीमा बढ़ाना चाहते हैं। क्योंकि, ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत कोटा देने के बाद आरक्षण के लिए 50 प्रतिशत की सीमा भंग हो गई है। कुशवाहा ने कहा कि भारत सरकार को इस सीमा को तुरंत समाप्त करना चाहिए।

इस मामले को लेकर जेडीयू में दो फाड़

उपेंद्र कुशवाहा की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए, पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह ने कहा कि सवर्णों को दिया गया 10 प्रतिशत कोटा उचित था। जय कुमार सिंह ने कहा कि जिस तरह से सामाजिक रूप से हाशिए वाले वर्गों की कई जातियों को अति पिछड़ी जातियों और दलितों के रूप में पहचाना गया था। उसी आधार पर उच्च जातियों के बीच आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की पहचान 10 प्रतिशत कोटा हासिल करने के लिए की गई थी। जेडीयू कोटे से पूर्व मंत्री रहे जय कुमार सिंह ने उपेंद्र कुशवाहा के बयान को गलत करार दिया और कहा कि उपेंद्र कुशवाहा को ये मुद्दा नहीं उठाना चाहिए। इससे कई राजनीतिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी कोटा सुप्रीम कोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है।

पूर्व मंत्री ने खोला मोर्चा

जय कुमार सिंह ने कहा कि 2019 में केंद्र की ओर से इस सुविधा को मंजूरी देने के बाद बिहार में ही इसे सबसे पहले लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि ऊंची जातियों में गरीब भी हैं जो इस सुविधा के हकदार हैं। आपको बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा से पहले, महागठबंधन के कई नेताओं ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में ईडब्ल्यूएस के लिए 10% कोटा बरकरार रखने के उच्चतम न्यायालय के आलोक में आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने की मांग की थी। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, हम प्रमुख जीतन राम मांझी और भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल थे।

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