13 अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता विफल हो गई। पाकिस्तान पर इस प्रक्रिया के दौरान ईरान के साथ “डबल गेम” खेलने का आरोप लगा है, जहाँ उसने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए ईरान को गुप्त रूप से समर्थन देने का प्रयास किया। वार्ता बेनतीजा रहने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
निम्नलिखित तथ्य ईरान और अमेरिका के साथ हुई व मध्यस्थता वार्ता में पाकिस्तान का ‘डबल क्रॉस’ खेल का पर्दाफाश करता है।
मध्यस्थता और दोहरा रुख: पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका के साथ कूटनीतिक संबंधों को साध रहा था, तो दूसरी तरफ उसने ईरान का साथ देकर खेल को बिगाड़ने की कोशिश की।
बातचीत के मुद्दे: वार्ता में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर दोनों पक्ष किसी ठोस निर्णय पर नहीं पहुंच पाए, जिससे वार्ता विफल हो गई।
परिणाम: इस विफल वार्ता के बाद अमेरिका ने होर्मुज में ईरान पर शिकंजा कसने की घोषणा की है, जिससे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान ने इस पूरे घटनाक्रम में अपनी स्थिति को एक अहम खिलाड़ी के रूप में पेश करने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता फेल होने के बाद उसे कूटनीतिक रूप से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जो इस क्षेत्र के भविष्य के लिए एक बड़ा झटका है।

