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जानिए अनिरूद्ध पांडे से संत प्रेमानंद जी महाराज बनने की कहानी, राधे कृष्ण का साक्षात् दर्शन के बाद बदल गई संत की जीवन धारा

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विकास कुमार
आप सबने वृंदावन के प्रेमानंद महाराज का प्रवचन सुना होगा। अपने सात्विक विचारों के लिए प्रेमानंद महाराज बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं। प्रेमानंद महाराज जी का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अखरी गांव में हुआ था। प्रेमानंद महाराज जी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। प्रेमानंद जी महाराज की माता का नाम रामा देवी और पिता का नाम शंभू पाण्डेेय था। प्रेमानंद महाराज के दादा सन्यासी थे। उनके घर का वातावरण भक्तिपूर्ण रहा करता था। उनके घर पर संतों और महात्माओं का आना जाना लगा रहता था। संतों का सत्संग सुनकर प्रेमानंद महाराज के मन और हृदय में आध्यात्म की बातें बैठ गई थी। धीरे धीरे प्रेमानंद जी महाराज के मन में भक्ति भावना भर गई।

घर का माहौल आध्याीत्मिकक होने की वजह से प्रेमानंद जी महाराज ने कम उम्र से चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया था। जब प्रेमानंद महाराज 5 वीं कक्षा में थे तब उन्होंने गीता, श्री सुखसागर पढ़ना शुरू किया। स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके मन में बहुत सारे सवाल उठते थे।इसका उत्तर तलाशने के लिए उन्होंने श्री राम और श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी का जाप किया। 13 साल की उम्र में महाराज जी ने एक दिन मानव जीवन जीने के पीछे की सच्चाई जानने के लिए अपना घर छोड़ दिया।

घर छोड़ने के बाद महाराज जी को नैष्ठिक ब्रह्मचर्य में दीक्षित किया गया था। उनका नाम बदल कर आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी नाम रखा। ईश्वर को पाने के लिए उन्होंने कठिन तपस्या की और तब से उनका सारा जीवन भगवान् की भक्ति में समर्पित हो गया है। अब वे अपना ज्यादा समय अकेले में बिताना पसंद करते है। सन्यासी के रूप में उनका अधिकांश समय गंगा नदी के किनारे बीतता था क्योकि महाराज ने कभी भी आश्रम के पदानुक्रमित जीवन को स्वीकार नहीं किया। वे खाना, मौसम और कपड़े की परवाह किए बिना ही वाराणसी और हरिद्वार में नदी के घाटों पर घूमते रहे। उनकी दिनचर्या कभी नहीं बदलती थी फिर चाहे कितनी भी ठण्ड क्यों न हो वे हमेशा गंगा नदी में 3 बार स्नान जरूर करते थे। उपवास के दौरान उन्होंने कई दिनों तक भोजन को त्याग कर दिया था। सन्यास और आस्था के कुछ वर्षो बाद उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिल गया।

बनारस के बाद प्रेमानंद जी महाराज श्री श्यामाश्याम की कृपा से वृंदावन की महिमा के प्रति आकर्षित हुए। उनके दिन की शुरुवात वृन्दावन की परिक्रमा और श्री बांकेबिहारी के दर्शन करना था। महाराज जी पूरा दिन राधावल्लभ जी को देखते रहते थे। वृन्दावन की परिक्रमा की तो उन्होंने खुद को श्री हरिवंश महाप्रभु का नाम जाप करते हुए पाया। एक प्रकार से ये श्री हरिवंश की लीला में मग्न हो गए। ऐसा कहा जाता है कि प्रेमानंद जी महाराज को मां राधे ने साक्षात् दर्शन दिया है। लोगों के हृदय को खुशी और शांति प्राप्त करने के लिए प्रभु का ध्यान, योग और नामजप करने की सलाह देते हैं।

कुछ समय पहले प्रेमानंद जी महाराज की सोशल मिडिया पर काफी चर्चा हो रही थी,क्योकि उनके पास क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा दर्शन के लिए आए थे। महाराज के दर्शन के बाद विराट कोहली ने दो शतक मारे थे।

अगर आप भी वृंदावन जाएं तो प्रेमानंद महाराज का दर्शन जरुर करें,इससे आपके मन में बैठी चिंताएं हमेशा के लिए दूर हो जाएंगी।

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