Christians को लुभाने के लिए मोदी ने बनाया जबरदस्त प्लान, जानिए ईसाई बहुल इलाकों में भी क्यों बीजेपी से हार रही है कांग्रेस पार्टी?

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विकास कुमार
साल 2021 के अक्टूबर महीने में रोम से आई एक तस्वीर ने भारत में खलबली मचा दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल रोमन कैथालिक ईसाईयों के सबसे बड़े धर्मगुरू पोप फ्रांसिस से मुलाकात की थी। दुनिया के ये दो महान हस्ती एक दूसरे से गले मिलते नजर आए थे। और तभी से भारत के चौक चौराहों पर इस तस्वीर की चर्चा होने लगी। आम लोगों के मन में दो बातें सबसे पहले आई। पहली बात ये कि हिंदुत्व की राजनीति करने वाली बीजेपी और संघ परिवार ने क्या ईसाईयों के प्रति अपनी सोच बदल दी है। और दूसरी बात ये कि क्या संघ परिवार मिशनरी के धर्मांतरण के खिलाफ मुहिम बंद कर देगी।


पोप के साथ मोदी की मुस्कुराती हुई तस्वीर बीजेपी के कोर वोटरों को बुरी तरह से चुभ रही थी। लेकिन धीरे धीरे सबको बीजेपी और संघ परिवार की रणनीति का अंदाजा लगने लगा। पहले पोप से मुलाकात का विरोध करने वाले कट्टर संघी भी अब इसे मास्टर स्ट्रोक बताने लगे हैं। संघ अपने पत्ते काफी सोच समझ कर खेलता है।

बीजेपी ने लंबे समय तक भारत पर शासन करने का ख्वाब संजोया हुआ है। लेकिन दक्षिण भारत और नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी का हिंदुत्व का एजेंडा सफल नहीं हो सकता था। इसलिए बीजेपी ने ईसाईयों का दिल जीतने के लिए लंबी प्लानिंग की है। पोप के साथ मोदी की मुलाकात भी इसी प्लानिंग का हिस्सा थी। जब पोप और मोदी की गले मिलती तस्वीरें भारत में वायरल हुईं,तो कहीं ना कहीं ईसाई समुदाय में बीजेपी को लेकर सोच बदली। फिर नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी को एक के बाद एक सफलता मिलने लगी।

उत्तर भारत में कांग्रेस पर बीजेपी की जीत तो सबके गले उतर जाती है। लेकिन नॉर्थ ईस्ट के ईसाई बहुल राज्यों में कांग्रेस का बीजेपी से हार जाना, किसी के गले नहीं उतरता है। हाल के विधानसभा चुनावों में नागालैंड और मेघालय में बीजेपी के गठबंधन ने जीत हासिल की है। मेघालय में ईसाइयों की आबादी लगभग 75 फीसदी और नागालैंड में 88 फीसदी है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में भी बीजेपी सत्ता में है, जहां तीस फीसदी से ज्यादा आबादी ईसाइयों की है। इसलिए कहीं ना कहीं ये साफ समझ में आता है कि बीजेपी ने ईसाइयों के बीच अपनी पैठ बना ली है।

हाल ही में ईसाई समुदाय ने गुड फ्राइडे का त्योहार मनाया था। इसमें भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक चर्च में हुए धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए। मोदी का ये कदम निश्चित तौर पर ईसाई समाज का दिल जीतने की एक सफल कोशिश लगती है।

अब बीजेपी केरल में ईसाईयों के बीच पैठ बनाने का दांव चल रही है। केरल के बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन और पी.के. कृष्णदास ने राज्य के बिशप घरों का दौरा किया है।बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष ने गुड फ्राइडे के दिन मलयात्तूर चर्च उत्सव में हिस्सा लिया था। दरअसल केरल कांग्रेस के पूर्व नेताओं का एक समूह ईसाई हितों के लिए एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए काम कर रहे हैं। हो सकता है कि ईसाईयों की ये नई पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर केरल में लेफ्ट को चुनौती देगी। इसलिए बीजेपी का खेल बहुत बड़ा है। लेकिन ताज्जुब कि बात है कि कांग्रेस ईसाई समुदाय के बीच भी अपनी पकड़ खोती जा रही है।

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