बीरेंद्र कुमार झा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अमित शाह के समक्ष केंद्रीय पुलिस बल (CRPF) भर्ती परीक्षा से जुड़ी कई बातों को रखा। केवल यही नहीं,उन्होंने अमित शाह से इस मामले में हसक्षेप करने की भी मांग की है ।स्टालिन ने अपने पत्र में लिखा है कि सीआरपीएफ ने घोषणा की है कि 9212 रिक्तियों में से 519 रिक्तियां तमिलनाडु में भरी जायेगी। लेकिन जिसने भी तमिलनाडु से इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है, वह इस परीक्षा को अपनी मातृभाषा में नहीं लिख सकता है। कुल एक सौ अंकों में से 25 अंक बेसिक के लिए आवंटित किए गए हैं। हिंदी की समझ जिससे केवल हिंदी भाषियों को ही लाभ होगा। यह पूरी तरह से तमिलनाडु के आवेदकों की सद्भावना के खिलाफ है। यह मनमानापूर्ण और भेदभावपूर्ण है।
हिंदी को अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना भेदभाव पूर्ण एवं एकतरफा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने केंद्र रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भर्ती के लिए कंप्यूटर परीक्षा में तमिल को शामिल नहीं किए जाने का विरोध करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।स्टालिन ने कहा कि अंग्रेजी एवं हिंदी को अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना भेदभाव पूर्ण एवं एक तरफा है।आज यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार सीआरपीएफ की 9212 व्यक्तियों में से 579 तमिलनाडु से भरी जानी है, जिसके लिए 12 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित होनी है।
केवल हिंदी भाषी उम्मीदवारों को ही होगा फायदा
मुख्यमंत्री स्टालिन ने पत्र में अमित शाह से कहा है कि केंद्र की यह सूचना की परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी में ही दी जा सकती है,तमिलनाडु के अभ्यर्थियों को अपने ही गृहराज्य में अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने में असमर्थ बनाती हैं।उन्होंने कहा कि इसके अलावा 100में से 25 हिंदी में मूलभूत बोध के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिससे केवल हिंदी भाषी उम्मीदवारों को ही फायदा होगा।
अभ्यर्थियों के सरकारी नौकरी हासिल करने में आएगी बाधा
सीआरपीएफ की इस विज्ञप्ति के बावत मुख्यमंत्री स्टालिन ने अमित शाह से कहा कि सरल शब्दों में कहा जाय तो सीआरपीएफ की अधिसूचना तमिलनाडु से आवेदन कर रहे अभ्यर्थियों के हितों के विरुद्ध है। यह न केवल एक तरफा है, बल्कि भेदभाव पूर्ण भी है । स्टालिन ने कहा कि इससे अभ्यर्थियों के सरकारी नौकरी हासिल करने में बाधा आएगी।उन्होंने कहा कि यह विज्ञप्ति अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध है।उन्होंने अमित शाह से परीक्षा प्रक्रिया में तमिल समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने और गैरहिंदी भाषी युवाओं को परीक्षा दे पाने में सक्षम बनाने हेतु तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ।

