- बीरेंद्र कुमार झा
पिछले दिनों रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में फैली हिंसा के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सतर्क नजर आ रही है। मंगलवार 4 अप्रैल को उन्होंने हिंदू भाइयों से अल्पसंख्यकों की रक्षा करने के लिए कहा और दावा किया कि गुरुवार 6 अप्रैल को जब देश हनुमान जयंती मना रहा होगा, तब इस राज्य में हिंसा की एक और दौर की योजना बनाई जा रही है।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि रामनवमी का त्यौहार खत्म होने के बाद भी हथियार और बम ले जाने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता अल्पसंख्यक इलाकों में जानबूझकर जुलूस निकाल रहे हैं। हुगली जिला के रिसड़ा और श्रीरामपुर में रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच झड़प के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की यह टिप्पणी सामनेआई है।
क्या कहा ममता बनर्जी ने
ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अपने हिंदू भाइयों को यह देखने की जिम्मेवारी सौंपूंगी कि 6 अप्रैल हनुमान जयंती के अवसर पर अल्पसंख्यकों के ऊपर कोई अत्याचार ना हो। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने हिंदुओं से अनुसूचित जाति और आदिवासी समुदायों को सुरक्षा देने का भी आग्रह किया।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
वही ममता बनर्जी के इस वक्तव्य के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता राहुल सिन्हा की भी प्रतिक्रिया सामने आ गई ।उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी का यह बयान सागर दिघी में उनकी पार्टी की हार के बाद आई है। हमने कहा कि इस चुनाव में मुसलमान और हिंदू दोनों ने ही उनकी पार्टी से मुंह मोड़ लिया इसलिए ममता बनर्जी पहले ही से बहाना बना रही है, ताकि अगर 6 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर कहीं कुछ गलत होता है तो वह बीजेपी को दोष दे सके। यह ममता बनर्जी की अपनी पार्टी के सहयोगियों की गलतियों पर पर्दा डालने की अच्छी चाल है।
सीपीआईएम ने क्या कहा
सीपीआईएम की केंद्रीय समिति के सदस्य डॉक्टर सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि अगर ममता बनर्जी को हनुमान जयंती पर संभावित हिंसा की जानकारी होती तो वे पूरबा मेदिनीपुर जिले का दौरा करने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के लिए प्रशासन के साथ बैठकर कर रही होती । सुजान चक्रवर्ती ने कहा ममता बनर्जी को यह पता लगाने के लिए पुलिस से मिलना चाहिए कि पहले की घटनाएं क्यों हुई और आगे जिस हिंसा की उन्हें अंदेसा है, उसे रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कैसे कड़ी की जा सकती है।

