अखिलेश अखिल
बिहार की समस्या को लेकर पिछले दिन दिल्ली में एक बैठक की गई। बैठक में बिहारी समाज से आने वाले बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया और बाढ़ से लेकर पलायन और बिहार की आर्थिक और औद्योगिक समस्या से लेकर कई और सामाजिक पहलुओं पर गहन मंथन किया गया। इस मंथन बैठक में राजनीतिक लोग भी शामिल हुए और कलाकार से लेकर शैक्षणिक हस्ती भी शामिल हुए। बड़ी संख्या में रहे पत्रकारों ने भी इस बैठक को सम्बोधित किया और बिहार की मौजूदा स्थिति पर चिंता भी व्यक्त की गई। अवसर था मैथिलि नाट्य साहित्य महोत्सव का। बड़ी संख्या में लोग जुमे थे ,मैथिलि कला का प्रदर्शन भी हुआ लेकिन असली कहानी बिहार की समस्या पर जा टिकी। बैठक में शामिल लोगों ने सबसे पहले दरभंगा में बनने वाले एम्स में हो रही देरी पर भारी चिंता जताई और केंद्र सरकार से आग्रह भी किया कि वह जल्द इसका निर्माण करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।
बुद्धिजीवियों का कहना था कि केंद्र, बिहार सरकार को इस पर मिलकर कार्य करना होगा। बाढ़ रोकने के लिए नेपाल—भारत सरकार के साथ ही बिहार सरकार की सहभागिता वाली एक त्रिपक्षीय समिति बनानी होगी। इस तरह की एक समिति दशकों से कागजों में नेपाल में चल रही है। लेकिन जमीन पर उसका कोई कार्य नहीं हो रहा है।
कार्यक्रम में दिल्ली के विधायक ऋतुराज झा, संजीव झा, दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर, बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री संजय झा ,मैथिली भोजपुरी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष नीरज पाठक, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के निदेशक रमेश चंद्र गौड़, कांग्रेस के सचिव प्रणव झा, भाजपा किसान मोर्चा के मनोज यादव और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह—प्रभारी संजय मयूख ने बिहार—मिथिलांचल के विकास और वर्तमान हालात पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर रौशन कुमार झा लिखित दो नाटकों बौकी व बिजहो का मंचन भी किया गया। जिसमें बिहार की कुरीतियों पर व्यंग्य के माध्यम से लोगों को इन पुरानी कुप्रथाओं के अब भी प्रचलन में होने को लेकर चर्चा करने पर मजबूर किया। बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी और भारत सरकार में संयुक्त सचिव डा. एन विजय लक्ष्मी ने इस अवसर पर गणेश वंदना पर मनमोहक भरतनाटयम नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि केंद्र सरकार को बिहार सरकार एवं नेपाल सरकार को साथ लेकर हर साल आने वाली बाढ़ पर प्रभावी रोक के लिए एक प्राधिकरण बनाने की जरूरत है। इसका निश्चित कार्यकाल हो। यहां की नदियों में बड़े बांध बनाने चाहिए। जिससे बाढ़ रूके। उन्होंने कहा कि नेपाल क्योंकि अलग देश है। ऐसे में केंद्र सरकार का आगे आना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वह जल संसाधन मंत्री है और यह देखकर हतप्रभ है कि एक कागजी समिति इस मुददे पर वर्षो से काम कर रही है। उसका नेपाल में कार्यलय भी है। भारत के अधिकारी भी वहां पर कथित रूप से तैनात हैं। लेकिन हकीकत में कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर बिहार में बाढ़ रोकने में मदद करती है तो वहां पर काफी रोजगार हो सकते हैं। इससे पलायन भी रूकेगा।
दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि दरंभगा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान संस्थान बनाया था। लेकिन उनके बाद की सरकार ने उसका राष्ट्रीय स्तर घटा दिया। जिससे मखाना उदयोग को नुकसान हुआ। वह इसे फिर से राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख ने कहा कि बिहार में कई भाषा है। सभी का अपना महत्व और इतिहास है। मैथिली को सबसे मीठी भाषाओं में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि जब कविराज विद्यापति की मां को लेकर की गई वंदना जय—जय भैरवी गाई जाती है। वह सीधे आपके दिल और दिमाग मे उतरती है। यह वंदना अद्भुत है। उन्होंने कहा कि मैथिल पत्रकार ग्रुप जिस तरह से अपनी भाषा, संस्कृति, रिति—रिवाज को बचाने के लिए लगातार कार्यक्रम कर रहा है। पत्रकारिता जैसे विषम और व्यवस्तता जैसी विधा में शामिल होने के बाद भी जिस तरह से इसके सदस्य यह कार्य कर रहे हैं। वह अप्रतिम है। उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद बिहार में विकास के जितने कार्य किये गए हैं। वह पहले नहीं हुए हैं। गंगा पर दूसरे पुल से लेकर नयी रेल लाइन और अन्य सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बिहार में बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वह एक एमएलसी के रूप में बिहार और मिथिलांचल के हर व्यक्ति के लिए कार्य करने को संकल्पित हैं।

