न्यूज़ डेस्क
गजब की राजनीति चल रही है। लगता है कांग्रेस और बीजेपी के बीच किसी युद्ध का शंखनाद हो। पहले बीजेपी के सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार का प्रस्ताव लाकर उसकी संसद सदस्यता खत्म करने की कोशिश की थी। इल्जाम लगाया गया था कि राहुल गांधी ने संसद में भाषण देकर पीएम मोदी की अवहेलना की। अभी उसका कोई फैसला आया भी नहीं हुआ कि आज कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने जैसे को तैसा बताकर पीएम मोदी के खिलाफ ही विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लगा दिया। इल्जाम लगाया लगाया कि पीएम मोदी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर अपमानजनक भाषा का उपयोग किया है।
कांग्रेस ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर पीएम नरेंद्र मोदी के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान दिए गए भाषण का हवाला दिया है। पीएम मोदी के भाषण के दौरान कांग्रेस नेताओं पर दिए गए उनके बयान को ही आधार बनाकर कांग्रेस की ओर से विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया गया है। कांग्रेस की ओर भेजे गए इस नोटिस में आरोप लगाया है कि पीएम मोदी का बयान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए अपमानजनक है। कांग्रेस के दोनों ही नेता लोकसभा के मौजूदा सांसद हैं।
राज्यसभा के सभापति को लिखे पत्र में कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के बयान को भी शामिल किया है। पत्र के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा था, “मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि चलो भाई, नेहरू जी का नाम हमसे कभी छूट जाता होगा और यदि छूट जाता है, तो हम उसे ठीक भी कर लेंगे… (व्यवधान)… क्योंकि वे देश के पहले प्रधानमंत्री थे, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि उनकी पीढ़ी का कोई भी व्यक्ति नेहरु जी का सरनेम रखने से क्यों डरता है? क्या शर्मिंदगी है? नेहरु सरनेम रखने में क्या शर्मिंदगी है?… (व्यवधान)… इतना बड़ा महान व्यक्ति आपको मंजूर नहीं है, परिवार मंजूर नहीं है…”
दूसरी ओर सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी भी लंदन में दिए गए बयान को लेकर राहुल गांधी से माफ़ी की मांग पर अड़ी है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार सुबह कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी जब आप भारत के आंतरिक मामलों में किसी दूसरे देश के दखल की मांग करते हैं, तो आपका इरादा क्या है? किसी दूसरे देश द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की मांग करना भारत की संप्रभुता पर हमला है। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि यूरोप और अमेरिका से भारत के घरेलू मामलों में दखल देने के पीछे उनकी क्या मंशा है?”

