हर समय थकान बने रहने, कमजोरी और वजन कम होने के लिए कोर्टिसोल है जिम्मेवार

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सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होना, शरीर में लगातार कमजोरी रहना और बिना डाइटिंग के वजन कम होते जाना—इन लक्षणों को अक्सर काम का तनाव, नींद की कमी या खानपान में गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन कुछ मामलों में ये शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। कोर्टिसोल एक जरूरी हार्मोन है, जो शरीर को तनाव से निपटने, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और ब्लड प्रेशर बनाए रखने में मदद करता है।

जब एड्रिनल ग्लैंड्स पर्याप्त कोर्टिसोल नहीं बना पातीं, तो इस स्थिति को एड्रिनल इनसफिशिएंसी कहा जाता है। इसके कारण थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, भूख कम लगना और वजन घटना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आइए समझते हैं कि कोर्टिसोल की कमी शरीर को किस तरह प्रभावित करती है।

एनआईडीडीकेडी के अनुसार कोर्टिसोल को आमतौर पर स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है। इसका निर्माण किडनी के ऊपर स्थित एड्रिनल ग्लैंड्स (Adrenal Glands) की बाहरी परत यानी एड्रिनल कॉर्टेक्स में होता है। यह हार्मोन शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। तनाव, बीमारी या चोट जैसी परिस्थितियों में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी इसकी अहम भूमिका होती है।

कोर्टिसोल का एक महत्वपूर्ण काम ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करना है। यह शरीर को जरूरत के अनुसार ऊर्जा उपलब्ध कराने, मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम की गतिविधियों को नियंत्रित करने में योगदान देता है। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर बनाए रखने और शरीर में सूजन से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इसका स्तर पूरे दिन एक जैसा नहीं रहता। आमतौर पर सुबह इसका स्तर अधिक और रात में कम होता है।

ऐसा जरूरी नहीं है कि लगातार थकान महसूस होने का मतलब शरीर में कोर्टिसोल की कमी ही हो। थकान एक सामान्य लेकिन लक्षण है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं में दिखाई दे सकता है। नींद पूरी न होना, एनीमिया, थायरॉइड की समस्या, डायबिटीज, संक्रमण, पोषण की कमी और मानसिक तनाव भी लगातार थकान के कारण हो सकते हैं।

साइंस डायरेक्ट के अनुसार हालांकि, अगर थकान के साथ मांसपेशियों में कमजोरी, भूख कम लगना, पेट में दर्द, चक्कर आना और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी दिखाई दे, तो एड्रिनल इनसफिशिएंसी की जांच पर विचार किया जा सकता है। इस स्थिति में लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं, इसलिए व्यक्ति लंबे समय तक इन्हें सामान्य कमजोरी समझ सकता है।

कोर्टिसोल शरीर को एनर्जी उपलब्ध कराने और ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। जब इसका स्तर जरूरत से कम हो जाता है, तो शरीर के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है।

शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होना: कोर्टिसोल ब्लड शुगर के नियमन में योगदान देता है। एनआईएच के अनुसार इसकी कमी होने पर शरीर के लिए ब्लड ग्लूकोज को सामान्य बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कुछ लोगों में ब्लड शुगर कम होने यानी हाइपोग्लाइसीमिया का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसके कारण थकान, कंपकंपी, पसीना और कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
मांसपेशियों में कमजोरी: एड्रिनल इनसफिशिएंसी में व्यक्ति को सामान्य गतिविधियां करने में भी परेशानी हो सकती है। सीढ़ियां चढ़ना, लंबे समय तक खड़े रहना या रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लग सकता है। यह कमजोरी सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मांसपेशियों में ताकत कम महसूस हो सकती है।

ब्लड प्रेशर कम होना: क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार खासतौर पर प्राइमरी एड्रिनल इनसफिशिएंसी में कोर्टिसोल के साथ एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) हार्मोन की भी कमी हो सकती है। एल्डोस्टेरोन शरीर में सोडियम और पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। व्यक्ति को बैठने या लेटने के बाद खड़े होते समय चक्कर आ सकते हैं।
मैयोक्लीनिक के मुताबिक अगर आप बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज बढ़ाए लगातार वजन कम होते देख रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एड्रिनल इनसफिशिएंसी में भूख कम लगना, पेट में परेशानी और वजन घटना आम लक्षणों में शामिल हैं।

कोर्टिसोल की कमी शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ मतली, उल्टी, पेट दर्द या दस्त जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इन परेशानियों के कारण व्यक्ति का खाने का मन कम हो सकता है और भोजन की मात्रा घट सकती है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने से वजन कम होने लगता है।

कोर्टिसोल की कमी शरीर की ऊर्जा, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और भूख को प्रभावित कर सकती है। लगातार थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और बिना डाइटिंग वजन घटना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं। इसलिए खुद से कोर्टिसोल की कमी मानने या दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और सही इलाज कराना जरूरी है।

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