मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह अपने विवादास्पद छवि के लिए जाने जाते हैं। प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास एक कार में अपने सहयोगियों की मदद से बम इंप्लांट कराने का मामला हो , चाहे मनसुख हिरेन हत्याकांड का मामला या फिर सचिन वाजे जैसे भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की मदद से अवैध उगाही का मामला हो ,परमवीर सिंह ऐसे कई मामलों में आरोपी रहे हैं, लेकिन सत्ता की गलियारे में अपनी पैठ और खुद के तिकड़मों के भरोसे यह हर बार अपने आप को इन आरोपों से मुक्त कराने में सफल रहे और कभी भी किसी भी मामले में जेल नहीं गये। लेकिन अब सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान के मामले, जिसमें आदित्य ठाकरे,डीनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती जैसे रसूखदार आरोपी हैं उसे मामले में इन आरोपियों को बचाने को लेकर परमवीर सिंह के भी अब जेल जाने की पूरी संभावना है। यद्यपि दिशा सालियां के पिता सतीश शालाएं के द्वारा दिशा सालियां के मामले के मुंबई पुलिस से सीबीआई के पास हस्तांतरित होने पर परमवीर सिंह को नामित आरोपी बनाए जाने के बावजूद अभी तक परमवीर सिंह पर कोई आरोप सत्यापित नहीं हुआ है, तथापि अपने ही मातहत रहे एसीपी भीमराज घाडगे के एक आरोप लगाए जाने पर जब परमवीर सिंह ने खुद ही एक एक एफिडेविट न्यायालय में दाखिल किया तो इस पर भी फोर्ज होने का आप लग गया और अब इसी मामले में 23 नवंबर को एक फैसला आने वाला है जिसमें इस शपथ नाम है की फोर्ज साबित होते ही परमवीर सिंह पर न्यायालय को गुमराह करने की एवज में जेल जाने की संभावना काफी बढ़ गई है।
पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से जुड़े विवादित हलफनामे (Affidavit) के मामले में विशेष एनआईए (NIA) अदालत द्वारा 23 नवंबर को अगली सुनवाई तय की गई है।यह पूरा मामला अदालती कार्यवाही में फर्जी हलफनामा पेश करने, फर्जी हस्ताक्षर (Impersonation) करने और गलत साक्ष्य देने के आरोपों से घिरा हुआ है।
इस मामला पर नजर डालने पर यह निम्नलिखित रूप में सामने आता है:
1. फर्जी हस्ताक्षर और अनुपस्थिति का आरोप: पूर्व एसीपी भीमराज घाडगे (Bhimraj Ghadge) ने विशेष एनआईए अदालत में एक याचिका (Application) दायर की है। उनका आरोप है कि सचिन वाजे मामले में परमबीर सिंह के नाम से जो हलफनामा कोर्ट में जमा किया गया था, उस पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी हैं और वह परमबीर सिंह के असली हस्ताक्षर नहीं हैं।
2. CCTV फुटेज का सबूत: शिकायतकर्ता के वकील निलेश ओझा के अनुसार, जिस बिल्डिंग में इस हलफनामे को नोटरी (Notarise) कराने का दावा किया गया था, वहां की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज निकाली गई है। इस फुटेज में उस दिन परमबीर सिंह कहीं भी आते-जाते दिखाई नहीं दे रहे हैं। आरोप है कि उनकी जगह किसी और व्यक्ति ने जाकर वहां फर्जी दस्तखत किए थे।
3. गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग: कोर्ट में गलत या फर्जी दस्तावेज पेश करना एक गंभीर अपराध है। इसलिए याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि परमबीर सिंह के खिलाफ अदालत को गुमराह करने, धोखाधड़ी (Perjury) और अवमानना (Contempt) का मुकदमा चलाया जाए।
इस मामले में न्यायलय क्या कर रही है?
दोनों पक्षों की दलीलें: हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जहां एक तरफ शिकायतकर्ता के वकील ने इस जालसाजी पर सख्त कार्रवाई की मांग की, वहीं सरकारी पक्ष और विरोधी वकीलों ने याचिकाकर्ता के लुकस स्टैंडाई (Locus Standi) यानी इस मामले में हस्तक्षेप करने के कानूनी अधिकार पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगला कदम (23 नवंबर की सुनवाई): अदालत इस मामले की गंभीरता को देख रही है। 5 नवंबर को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के लिए 23 नवंबर को दोपहर 3:00 बजे की तारीख तय की है, जिसमें याचिका की वैधता और इस फर्जीवाड़े के आरोपों पर आगे का निर्णय या निर्देश आ सकता है।

