एनसीबी-ईडी की रिपोर्ट सीबीआई को दिशा सालियान मामले में नहीं करने देगी लीपापोती

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 बॉम्बे हाई कोर्ट के द्वारा दिशा सालियां की जांच के मामले को मुंबई पुलिस से छीनकर सीबीआई के हवाले करने का आदेश दिया। तब तब आदित्य ठाकरे रिया चक्रवर्ती डीनो मोरिया परमवीर सिंह आदि को बड़ा झटका लगा था क्योंकि इनकी  देखरेख  में मुंबई पुलिस ने इस मामले मे दिशा सालियान के द्वारा आत्महत्या करने का रिपोर्ट दिया था जिससे इन लोगों को राहत मिलती दिख रही थी।
सीबीआई ने जब यह मामला मुंबई पुलिस से अपने हाथ में लिया तब दिशा सालियन के पिता सतीश सालियान के द्वारा इन लोगों को नामित करते हुए एफआईआर दर्ज करवा दिया, तब झटका लगने के बावजूद इन लोगों के हाव-भाव कुछ ऐसे थे जिससे लगता था कि यह सीबीआई को भी मैनेज कर लेंगे । मामला हाथ में आने के बाद 56 दिन बीत जाने पर भी जब सीबीआई ने इन लोगों से कोई कस्टोडियल इंक्वारी नहीं की तब आम लोगों को भी यहां लगने लगा कि कहीं हो या ना हो आरोपी कहीं अपने रसूख का प्रयोग कर सीबीआई को भी नो भरमा दे।
सीबीआई के द्वारा 56 दिन बीत जाने के बावजूद  दिशा सालियान मामले में नामित आरोपियों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से इन आरोपियों का तिकड़म करने के लिए मनोबल बढ़ना और आम लोगों का जांच एजेंसी पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है। लेकिन ईडी और एनसीबी की सुशांत सिंह राजपूत मामले में जांच के दौरान पाई गई कुछ ऐसी सबूत हैं जो ना तो सीबीआई को अपने काम में ढिलाई बरतने देगी और न हीं आदित्य ठाकरे परमवीर सिंह रिया चक्रवर्ती और दिनों मारियो मोरिया जैसे आरोपियों को तिकड़म करने देगी। आइये अब जानते हैं कि ईडी और एनसीबी की सुशांत सिंह राजपूत मामले में क्या थी वह खास जांच रिपोर्ट।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की एंट्री किस तरह और किन मामलों में हुई थी, उसका पूरा विवरण इस प्रकार है:
 ED (प्रवर्तन निदेशालय) की एंट्री और मामला
शिकायत और मामला: सुशांत सिंह राजपूत के पिता के.के. सिंह ने पटना में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार ने सुशांत के बैंक खाते से करीब 15 करोड़ रुपये गैर-कानूनी तरीके से निकाल लिए या हेराफेरी (Money Laundering) की है।
 ED की एंट्री: इसी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच करने के लिए ED ने 31 जुलाई 2020 को इस मामले में एंट्री की और रिया चक्रवर्ती तथा अन्य से पूछताछ शुरू की।
 जांच का नतीजा: ED की जांच के दौरान यह सामने आया कि सुशांत के खातों से रिया के खाते में कोई बड़ा या सीधा ट्रांसफर नहीं मिला था, लेकिन पैसों के कई अन्य लेन-देन और सुशांत सिंह राजपूत के मोबाइल फोन की चैट खंगाली जा रही थी।
Narcotics (NCB / नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की एंट्री और मामला
 चैट का खुलासा: ED जब पैसों के लेन-देन और रिया चक्रवर्ती के फोन की चैट्स की जांच कर रही थी, तब रिया और अन्य लोगों के बीच ड्रग्स (नशीले पदार्थों) से जुड़ी व्हाट्सएप चैट सामने आई।
 NCB की एंट्री: ED ने इस ड्रग्स चैट और साक्ष्यों की जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और सीबीआई के साथ साझा की। इसके बाद अगस्त 2020 में NCB ने इस मामले में आपराधिक मामला  दर्ज कर ड्रग्स एंगल पर जांच शुरू की।
 क्या था मामला:
 चैट में प्रतिबंधित दवाओं, गांजा, सीबीडी (CBD) ऑयल और अन्य नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त का जिक्र मिला।
जांच में यह बात सामने आई कि सुशांत के लिए ड्रग्स की व्यवस्था कथित तौर पर रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती, सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा और दीपेश सावंत समेत अन्य लोगों द्वारा की जाती थी।
 इस मामले में रिया चक्रवर्ती को सितंबर 2020 में NCB ने गिरफ्तार भी किया था, जो बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आईं। बाद में इस ड्रग्स कनेक्शन से जुड़े कई अन्य पैडलर्स और सप्लायर्स की भी गिरफ्तारियां हुईं थी।

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