RO का पानी पीने वालों में हो रही है व‍िटाम‍िन B12 की कमी!स्टडी में खुलासा, क्‍या करें

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आजकल लाखों भारतीय घरों में पीने के लिए RO (Reverse Osmosis) वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करते हैं. इसका मकसद पानी को साफ और सुरक्षित बनाना होता है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि यही RO का पानी आपकी सेहत पर कोई दूसरा असर भी डाल सकता है? एक भारतीय अध्ययन में RO के पानी और Vitamin B12 की कमी के बीच एक संभावित संबंध पाया गया है, हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है।

हाल के सालों में भारत में विटामिन बी12 की भारी कमी देखी जा रही है। हर दूसरा इंसान थकान, कमजोरी या नसों में दर्द का रोना रोता दिखता है।इसी बात को समझने के लिए पश्चिमी भारत के डॉक्टरों ने एक बेहद दिलचस्प रिसर्च की।इस स्टडी ने हर किसी के कान खड़े कर दिए हैं क्योंकि इसमें आरओ के पानी और विटामिन बी12 के बीच एक अजीब सा कनैक्शन सामने आया है।

पश्चिम भारत में किए गए एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन में 250 लोगों को शामिल किया गया।शोधकर्ताओं ने उन लोगों को अध्ययन से बाहर रखा जिनमें पहले से Vitamin B12 की कमी के ज्ञात कारण मौजूद थे। अध्ययन में भोजन की आदतों, दूध और डेयरी उत्पादों के सेवन, RO पानी के उपयोग और Vitamin B12 स्तर की जांच की गई।

यह रिसर्च एकांत सुरेंद्र गुप्ता, संकेत प्रांजीवन शेठ और जयश्री दीपक गंजवाले नाम के शोधकर्ताओं ने की थी।डॉक्टरों की इस टीम ने 250 लोगों पर गहराई से पड़ताल की।डॉक्टरों ने उन सभी लोगों को पहले ही इस रिसर्च से बाहर कर दिया था, जिनमें विटामिन बी12 की कमी की कोई पुरानी या जानी-पहचानी बीमारी पहले से थी।इन 250 लोगों के खान-पान, दूध और पनीर के इस्तेमाल और वे किस तरह का पानी पीते हैं, इसका पूरा हिसाब-किताब रखा गया।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आरओ का पानी ही विटामिन बी 12 की कमी के लिए जिम्मेदार है?
इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है।अध्ययन में केवल संबंध (association) पाया गया, यह साबित नहीं हुआ कि RO का पानी सीधे Vitamin B12 की कमी का कारण बनता है।शोधकर्ताओं ने भी अपने निष्कर्ष में कहा कि इस संबंध की पुष्टि के लिए बड़े और लंबी अवधि वाले अध्ययनों की आवश्यकता है।

आंकड़े देखकर पहली नजर में किसी को भी लग सकता है कि आरओ का पानी ही शरीर से विटामिन बी12 गायब कर रहा है,लेकिन डाक्टरों का कहना है कि बात इतनी सीधी भी नहीं है।

मेडिकल साइंस में इसे एसोसिएशन कहा जाता है, यानी दो चीजें एक साथ घटती हुई दिखी हैं। इसका यह कतई मतलब नहीं है कि आरओ का पानी सीधे तौर पर बी12 को नष्ट कर देता है।पानी में खुद विटामिन बी12 नहीं पाया जाता।यह विटामिन मुख्य रूप से खान-पान की चीजों से मिलता है।

वैज्ञानिकों का एक अनुमान यह जरूर है कि आरओ पानी में जरूरी मिनरल्स के साथ-साथ पानी में मौजूद कुछ ऐसे कुदरती तत्व या सूक्ष्म जीवाणु भी छन जाते हैं, जो हमारे पेट के बैक्टीरिया को मजबूत रखते हैं।जब पेट के अच्छे बैक्टीरिया कमजोर पड़ते हैं, तो शरीर खाने में से बी12 को ठीक से सोख नहीं पाता।हालांकि, डाक्टरों ने साफ कहा है कि इस बात को सौ फीसदी सच मानने के लिए अभी और बड़े पैमाने पर रिसर्च की जरूरत है।

RO (Reverse Osmosis) तकनीक पानी से गंदगी, बैक्टीरिया, वायरस और कई हानिकारक तत्वों को हटाने में मदद करती है। हालांकि, इसी प्रक्रिया के दौरान पानी में मौजूद कुछ लाभकारी मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम की मात्रा भी कम हो सकती है।यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक केवल अत्यधिक शुद्ध किए गए पानी पर निर्भर रहने से शरीर को मिलने वाले कुछ जरूरी म‍िनरल्‍स की मात्रा पर असर डाल सकती है।
यहां यह समझना भी बेहद जरूरी है कि शरीर को जरूरी मिनरल्स और विटामिन मुख्य रूप से भोजन से मिलते हैं, न कि स‍िर्फ पानी से. इसलिए सिर्फ RO का पानी पीने से किसी व्यक्ति में Vitamin B12 की कमी हो जाएगी, ऐसा नतीजा नहीं निकाला जा सकता। Vitamin B12 आमतौर पर दूध, दही, अंडे, मछली, मांस और फोर्टिफाइड फूड्स जैसे खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगरआपके घर में RO सिस्टम लगा है तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पानी की गुणवत्ता के अनुसार उसका इस्तेमाल हो रहा हो। कई आधुनिक RO सिस्टम में मिनरलाइजर तकनीक भी होती है, जो पानी में कुछ जरूरी खनिजों को दोबारा जोड़ने में मदद कर सकती है।

विटामिन बी12 शरीर की पूरी मशीनरी को सही सलामत चलाने के लिए बेहद जरूरी ईंधन की तरह काम करता है।

यह हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स को बनाने में सबसे मुख्य रोल निभाता है।
हमारे दिमाग और नसों के पूरे जाल को दुरुस्त रखने का काम इसी विटामिन के जिम्मे होता है।
शरीर में डीएनए का निर्माण और कोशिकाओं की मरम्मत के लिए यह बहुत आवश्यक है।
यह हमें दिनभर चुस्त-दुरुस्त रखता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखता है।
कमी होने पर शरीर देता है खतरे के ये सिग्नल
जब शरीर में बी12 का लेवल तेजी से गिरने लगता है, तो इंसान को कई तरह की रोजमर्रा की तकलीफें घेरने लगती हैं।

सुबह उठते ही भारी थकान, बदन में सुस्ती और जरा सा काम करने पर सांस फूलना।
हाथ-पैरों के पंजों में सुई जैसी चुभन, झनझनाहट या कभी-कभी अंगों का एकदम सुन्न पड़ जाना।
छोटी-छोटी बातें भूलने लगना, सिर भारी रहना या अचानक चक्कर आना।
मुंह में बार-बार छाले होना और भूख कम लगना।
किन लोगों में B12 की कमी का खतरा ज्यादा होता है?
Vitamin B12 मुख्य रूप से दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मांस जैसे पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है. इसलिए निम्न लोगों में इसकी कमी का जोखिम अधिक हो सकता है:

लंबे समय से शुद्ध शाकाहारी लोग
बुजुर्ग
पाचन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग
कुछ दवाएं लंबे समय तक लेने वाले मरीज।
RO Water को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत है या नहीं। इस रिसर्च को पढ़कर बिल्कुल भी घबराने या कल ही अपने घर का आरओ उखाड़ फेंकने की जरूरत नहीं है। जिन इलाकों में जमीन का पानी बहुत खारा है, जिसमें टीडीएस बहुत ज्यादा है या सीवेज का गंदा पानी रिसने का डर रहता है, वहां आरओ टाइफाइड और हैजा जैसी जानलेवा बीमारियों से हमारी हिफाजत करता है।
समझदारी इसी में है कि अगर आप लंबे समय से आरओ का पानी पी रहे हैं, तो साल में एक बार अपना विटामिन बी12 लेवल जरूर चेक करवाएं। अपने खाने में दूध, दही, पनीर और मेवे जैसी चीजों की मात्रा बढ़ाएं।अगर टेस्ट में लेवल कम आता है, तो डाक्टर से मिलकर थोड़े दिन सप्लीमेंट या गोलियां ले लें। समस्या पानी में नहीं, बल्कि हमारी सतर्कता और खान-पान में लापरवाही में छिपी होती है।

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