भारत को मिला अमेरिका का साथ, 6G नेटवर्क के लिए मिलकर नियम तय करेंगे कई देश

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भारत 6G की रेस में आगे रहने के लिए लगातार काम कर रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय (डिपार्टमेंट ऑफ कॉर्मस) ने बताया है कि भारत, अमेरिका और 24 अन्य देश एक साथ मिलकर भविष्य की नई इंटरनेट टेक्नोलॉजी 6G नेटवर्क को बनाने और उसके नियम तय करने पर काम करेंगे। इससे साफ-साफ दिख रहा है कि 6G के भविष्य को तय करने में अब भारत एक अहम भूमिका निभाएगा। बता दें कि वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने G20 इनोवेशन मिनिस्टीरियल के दौरान अमेरिका के व्यापार और उद्योग मंत्री हॉवर्ड लटनिक से मुलाकात की थी, जहां दोनों ने 6G टेक्नोलॉजी के भविष्य पर चर्चा की।

दरअसल, अमेरिका के कॉमर्स विभाग ने X पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में बताया गया है कि आज हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत, अमेरिका और 24 अन्य देशों के साथ 6G के विकास में शामिल हो गया है ताकि यह ताकि यह पक्का किया जा सके कि भविष्य की 6G इंटरनेट तकनीक हमारी सुरक्षा का ध्यान रखे, देश को बिजनेस और तकनीक में दूसरों से आगे रखे और नवाचार को बढ़ावा दे।

यह खबर ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका के मियामी शहर में G20 शिखर सम्मेलन हो रहा है, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंत्री लेवल पर कई बैठक में हिस्सा लिया।

भारत इसी साल जुलाई में अमेरिका की टेलीकॉम एजेंसी (NTIA) द्वारा शुरू की गई ‘6G लीडरशिप और सिक्योरिटी’ पहल का हिस्सा बना है। इस समझौते के तहत भारत और बाकी 25 देश अगले 12 महीनों तक मिलकर एक सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंद 6G नेटवर्क ढांचा तैयार करेंगे। इस पार्टनरशिप का मकसद 6G नेटवर्क में साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, अलग-अलग कंपनियों के उपकरणों को आपस में आसानी से जोड़ने योग्य बनाना और नेटवर्क को संभालने के लिए सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना है।

इसके साथ ही भारत अपने ‘भारत 6G मिशन’ के जरिए खुद को 6G तकनीक के ग्लोबल हब के रूप में स्थापित कर रहा है। भारत का लक्ष्य सिर्फ 6G का इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि इसके नए पेटेंट, उपकरण और सस्ते टेलीकॉम प्रोडक्ट्स बनाकर पूरी दुनिया में निर्यात करना भी है।

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