Disha Salian Death Case: दिशा सालियान की मौत का सच आएगा सामने? CBI करेगी जांच, हाई कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

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Disha Salian Death Case: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने का निर्देश दिया। कोर्ट ने CBI को FIR दर्ज करने और दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान रिकॉर्ड करने के लिए भी कहा है।

यह आदेश दिशा सालियान के पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनाया गया। याचिका में उन्होंने अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों और मुंबई पुलिस की अब तक की जांच पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से जांच की मांग की थी।

CBI को क्या-क्या करना होगा?

जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीतसिंह राजा भोंसले की पीठ ने जांच को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत के मुताबिक CBI को मामले में FIR दर्ज करनी होगी और मृतका के पिता का बयान दर्ज करना होगा। इसके साथ ही मुंबई पुलिस को केस से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज CBI को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने जांच के दौरान एक अहम कानूनी सावधानी भी स्पष्ट की है। सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा। किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सामग्री या उचित संदेह पैदा करने वाला सबूत सामने आने के बाद ही जांच अधिकारी आगे की कार्रवाई कर सकेगा।

जांच में कुछ नहीं मिला तो क्या होगा?

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर CBI की जांच में कोई आपराधिक मामला बनता हुआ नहीं मिलता है, तो एजेंसी संबंधित अदालत के सामने उचित समरी/क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। वहीं, दिशा के पिता सतीश सालियान को ऐसी रिपोर्ट से असहमति होने पर उसे अदालत में चुनौती देने की स्वतंत्रता रहेगी।

8 जून 2020 को क्या हुआ था?

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में हुई थी। वह एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिर गई थीं। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report (ADR) दर्ज कर जांच शुरू की थी। बाद की पुलिस जांच में मौत को आत्महत्या बताया गया था।

लेकिन दिशा के पिता इस निष्कर्ष से सहमत नहीं थे। उन्होंने बाद में हाई कोर्ट का रुख किया और पुलिस की जांच तथा उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

पिता ने लगाए थे गंभीर आरोप

सतीश सालियान की याचिका में दावा किया गया कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि गैंगरेप और हत्या का मामला थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाने और सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच में साबित किया जाना बाकी है। हाई कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि पर्याप्त सबूत सामने आने से पहले किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा।

पिता ने अपनी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग भी की थी। हालांकि, कोर्ट का मौजूदा निर्देश किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने वाला आदेश नहीं है; जांच के दौरान सामने आने वाली सामग्री के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद क्या बदलेगा?

अब इस मामले की जांच CBI के जिम्मे होगी। एजेंसी पहले दिशा के पिता का बयान दर्ज करेगी, FIR की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी और मुंबई पुलिस के पास मौजूद केस रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर जांच करेगी।

इस फैसले के बाद करीब छह साल पुराने इस मामले में एक बार फिर जांच का नया दौर शुरू होगा। दिशा के पिता ने अदालत के फैसले पर भरोसा जताते हुए कहा कि यह उनकी लंबे समय से चल रही न्याय की लड़ाई में अहम कदम है।

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