एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो क्यों छिपा रही जान लेवा तथ्य ?

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भारत में विमान हादसों की जांच करने वाली सरकारी एजेंसी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) पर किसी भी जानकारी को जानबूझकर छुपाने का भले ही कोई प्रमाणित आरोप नहीं है, लेकिन जांच की गोपनीयता और गोपनीयता नियमों को लेकर आम लोगों को हवाई यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं।12 जून 2025 को हुए अहमदाबाद एयर इंडिया AI171 विमान हादसे और हालिया अगस्त 2026 की एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की तकनीकी खराबी जैसी घटनाओं के बाद, जांच प्रक्रिया को लेकर कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:
कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग (CVR) को सार्वजनिक न करना विमानन संघों और व्हिसलब्लोअर्स ने सवाल उठाए हैं कि जांच एजेंसियां कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) की मूल ऑडियो रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक नहीं कर रही हैं। इस पर AAIB ने सुप्रीम कोर्ट और अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों (ICAO) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि पायलटों की गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण मूल ऑडियो सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, हालांकि अंतिम रिपोर्ट में इसकी पूरी लिखित ट्रांसक्रिप्ट (बातचीत का पाठ) शामिल की जाएगी।

फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर विरोधाभास शुरुआती जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि टेक ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद (Cut-off) हो गए थे। पायलट यूनियनों (जैसे ALPA इंडिया) ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां विमान निर्माता कंपनी (बोइंग) को बचाने और मृत पायलटों पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, जुलाई 2026 में सरकार ने संसद में साफ किया कि एडवांस टेस्टिंग में स्विच में कोई तकनीकी खराबी नहीं मिली है और सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है।
अंतिम रिपोर्ट में देरी पर स्पष्टीकरण अंतिम जांच रिपोर्ट आने में हो रही देरी के कारण पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे थे। इसके जवाब में AAIB ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सूचित किया है कि यह कोई घरेलू या “इन-हाउस” जांच नहीं है। इसमें विदेशी एक्सपर्ट्स (जैसे अमेरिका की NTSB, फ्रांस की BEA) और विमान निर्माता कंपनियों के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि अंतिम ड्राफ्ट रिपोर्ट अक्टूबर 2026 तक तैयार कर ली जाएगी।

स्वायत्तता (Independence) पर सवाल विमानन विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे The Hindu के ओपिनियन) में यह मुद्दा उठाया गया है कि AAIB तकनीकी रूप से नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के अधीन काम करती है, जो खुद एयरलाइंस और रेगुलेटर (DGCA) की निगरानी करता है। इस कारण कुछ लोग इसके हितों के टकराव (Conflict of Interest) पर सवाल उठाते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर एजेंसी एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय के रूप में ही काम कर रही है।

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