प्लास्टिक नोट के बाद भविष्य में आ सकते हैं चिप और ई-इंक डिस्प्ले वाले स्मार्ट नोट

0
8

हाल ही में भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को 10 रुपये के प्लास्टिक या पॉलिमर बैंक नोटों का फील्ड ट्रायल करने की मंजूरी दी है। इन नोटों को फ्यूचर फ्रूफ बताया जाता है क्योंकि ये नोट कागज के नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं, पानी में भी खराब नहीं होते और लंबे समय तक चल सकते हैं। हालांकि टेक्नोलॉजी जिस रफ्तार से बदल रही है उसे देखते हुए सवाल उठ सकता है कि क्या प्लास्टिक नोट ही करेंसी का आखिरी रूप है तो इसका जवाब है नहीं।
टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्रियों की मानें, तो भविष्य की करेंसी प्लास्टिक नोटों से भी एक कदम आगे बढ़कर स्मार्टनोटों के रूप में सामने आ सकती है। इनकी खासियत होगी कि ये ऑनलाइन और ऑफलाइन पेमेंट के फर्क को खत्म कर सकते हैं। गौर करने वाली बात है कि फिलहाल यह सिर्फ एक कॉन्सेप्ट है।
इतिहासकार और मुद्रा विशेषज्ञ फ्रैंकलिन नॉल (Franklin Noll) के अनुसार, स्मार्ट बैंक नोट पारंपरिक कागज या प्लास्टिक करेंसी और डिजिटल पेमेंट का एक हाइब्रिड (मिश्रण) रूप होगा।
स्मार्ट नोटों का कॉन्सेप्ट कुछ ऐसा है कि ये छूने या देखने में किसी भी आम नोट जैसे होंगे लेकिन इनमें एक RFID जैसी कोई इलेक्ट्रॉनिक चिप और इलेक्ट्रॉनिक इंक मौजूद होगी।
इनकी मदद से भविष्य के ये नोट डिजिटल नेटवर्क और स्मार्टफोन से कनेक्ट हो पाएंगे। इन नोटों को छूकर या स्कैन करके इनसे डिजिटल पेमेंट भी की जा सकेगी। साथ ही इन्हें फिर से रिचार्ज करके ऑफलाइन बाजार में आम नोट की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा।

स्मार्ट नोटों का कॉन्सेप्ट कहता है कि अगर आपके पास 100 रुपये का स्मार्ट नोट होगा, तो नोट में लगी चिप और ई-इंक स्क्रीन पर यह साफ दिखाई देगा कि नोट में पैसे या कहें कि वैल्यू मौजूद है या नहीं।
आप उस स्मार्ट नोट के जरिए दुकानदार को डिजिटल पेमेंट भी कर पाएंगे और ऐसा करने पर नोट पर दिखने वाली वैल्यू 0 हो जाएगी, जिससे नोट को देखकर समझ में आएगा कि उसे डिजिटल तौर पर खर्च किया जा चुका है।
इस नोट में फिर से 100 रुपये फोन या दूसरे डिजिटल माध्यम से रिचार्ज करके इसे एक आम नोट की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

दुनिया भर के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी बनाने पर काम कर रहे हैं, फिर भी उसका पूरी तरह डिजिटल होना संभव नहीं है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कई लोगों के पास बैंक खाते या स्मार्टफोन नहीं हैं, वे डिजिटल ट्रांजेक्शन का फायदा नहीं उठा सकेंगे।
इसके अलावा नेटवर्क या इंटरनेट बंद होने पर स्थिति में पूरी तरह डिजिटल पेमेंट्स ठप हो जाते हैं, लेकिन स्मार्ट नोट ऑफलाइन भी आम पैसों की तरह हाथों-हाथ चलेंगे।
संकट या मंदी के समय लोग कैश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। ऐसे में स्मार्ट नोट उन्हें सुरक्षा का भाव भी देगा और स्मार्ट फंक्शनैलिटी भी।
आज जिस तरह से भारत में प्लास्टिक नोटों की ओर कदम बढ़ाया है, उम्मीद की जाती है कि भविष्य में दुनिया उसी तरह स्मार्ट नोट ईजाद कर लेगी और करेंसी ऑनलाइन-ऑफलाइन के भेद को मिटा देगी। ​

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here