Analog Paneer Ban: बाजार में खाद्य पदार्थों में मिलावट की बढ़ती शिकायतों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने पनीर को लेकर बड़ा कदम उठाया है। लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए राज्य में एनालॉग यानी नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर रोक लगा दी गई है।
इस फैसले के बाद महाराष्ट्र ऐसा कदम उठाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ में भी एनालॉग पनीर पर कार्रवाई की जा चुकी है। सरकार का मकसद बाजार में मिलावटी या गैर-डेयरी विकल्पों की बिक्री पर रोक लगाकर उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
आखिर Analog Paneer क्या होता है?
एनालॉग पनीर सामान्य डेयरी पनीर से अलग होता है। इसे पूरी तरह ताजे दूध से तैयार करने के बजाय वनस्पति वसा, मिल्क पाउडर या मिल्क सॉलिड, स्टार्च और अन्य सामग्री के इस्तेमाल से बनाया जा सकता है।
इसका स्वरूप कई बार इतना मिलता-जुलता होता है कि सामान्य ग्राहक इसे पहली नजर में असली पनीर से अलग नहीं कर पाता। यही वजह है कि होटल, ढाबे, कैटरिंग और दूसरे खाद्य कारोबारों में इसके इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
इस तरह के उत्पाद की लागत पारंपरिक दूध से बने पनीर की तुलना में कम हो सकती है। यही आर्थिक कारण कुछ कारोबारियों को इसे इस्तेमाल करने के लिए आकर्षित कर सकता है।
सेहत को लेकर क्यों उठे सवाल?
असली डेयरी पनीर में दूध से मिलने वाला प्रोटीन और वसा मौजूद होता है, जबकि एनालॉग पनीर की संरचना अलग हो सकती है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री के कारण इसका पोषण मूल्य भी पारंपरिक पनीर जैसा जरूरी नहीं है।
महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई जांचों में पनीर के कई नमूनों में वनस्पति वसा की मौजूदगी सामने आने की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, लिए गए नमूनों के एक बड़े हिस्से में निर्धारित मानकों को लेकर सवाल उठे। इसी तरह की चिंताओं के बाद राज्य सरकार ने एनालॉग पनीर के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
महाराष्ट्र में अब क्या-क्या प्रतिबंधित है?
खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से 30 जुलाई को जारी आदेश के बाद राज्य में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर से संबंधित कई गतिविधियों पर रोक लागू की गई है। इसके तहत ऐसे उत्पाद का निर्माण, प्रोसेसिंग,पैकिंग,भंडारण,परिवहन,वितरण बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
यानी राज्य में इस तरह के पनीर की पूरी सप्लाई चेन पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
नियम तोड़ने पर कितनी सजा?
एनालॉग पनीर से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मामले की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रावधान हो सकता है।
इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों को खाद्य मानकों का पालन करने के लिए बाध्य करना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना है।
ग्राहक कैसे रहें सावधान?
पनीर खरीदते समय केवल उसकी शक्ल देखकर उसकी गुणवत्ता तय करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए भरोसेमंद दुकान या ब्रांड से उत्पाद खरीदना, पैकेट पर दिए गए लेबल, सामग्री और लाइसेंस संबंधी जानकारी को देखना और संदिग्ध उत्पाद मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करना बेहतर विकल्प है।
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद अब खाद्य कारोबारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के बीच भी Analog Paneer और मिलावटी पनीर को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

