पटना: साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसी बढ़ती ऑनलाइन ठगी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बिहार सरकार ने राज्यव्यापी अभियान तेज करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में साइबर अपराध की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए गए।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में लोग तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि इस हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके।
हर बिजली बिल, सुधा उत्पाद और सार्वजनिक स्थानों पर दिखेगा 1930
सरकार ने जागरूकता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। निर्देश दिए गए हैं कि बिजली बिलों पर 1930 हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से छापा जाए और बिजली भुगतान से जुड़े मोबाइल ऐप्स पर भी इसका संदेश प्रदर्शित किया जाए।

इसके अलावा ‘सुधा’ दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग, सुधा पार्लरों, नगर निगम के डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, एलईडी स्क्रीन और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर भी साइबर जागरूकता संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में नियमित रूप से ‘साइबर मंगलवार’ जैसे जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने के निर्देश भी दिए गए।
ऑपरेशन साइबर प्रहार में बड़ी सफलता
बैठक में बताया गया कि ऑपरेशन साइबर प्रहार के तहत राज्यभर में संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई। इस अभियान के दौरान 6,251 म्यूल बैंक खातों का सत्यापन किया गया, 702 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और 507 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
देश के बड़े साइबर हॉटस्पॉट में शामिल बिहार के चार जिले
समीक्षा के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि देश के प्रमुख साइबर हॉटस्पॉट जिलों में बिहार के नवादा, नालंदा, पटना और शेखपुरा शामिल हैं। वहीं, एटीएम और चेक के जरिए धोखाधड़ी से पैसे निकालने के मामलों में भी पटना प्रमुख जिलों में गिना गया है। इन क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
साइबर पीड़ितों को राशि लौटाने पर भी जोर
राज्य में साइबर ठगी के पीड़ितों को जल्द राहत दिलाने के लिए Money Restoration Module (MRM) के तहत 16,593 मामलों पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 5,642 मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद करीब 2.24 करोड़ रुपये (₹224.53 लाख) की राशि वापस कराने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
वहीं, Grievance Redressal Module (GRM) के तहत बैंकों द्वारा खातों को फ्रीज किए जाने से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में बिहार ने 98 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
दूसरे राज्यों के साथ समन्वय और तकनीकी कार्रवाई तेज
बैठक में बताया गया कि अंतरराज्यीय जांच से जुड़े मामलों में बिहार पुलिस ने समन्वय (CIAR) पोर्टल के माध्यम से 90.22 प्रतिशत अनुरोधों का सफल निष्पादन किया है। वहीं, ‘सहयोग’ पोर्टल के जरिए साइबर अपराध से जुड़े भ्रामक और अवैध ऑनलाइन कंटेंट के खिलाफ भेजे गए अनुरोधों में 75.65 प्रतिशत URLs हटवाने में सफलता मिली है।
इसके साथ ही राज्य में 4,221 से अधिक पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध अनुसंधान और साइबर सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

मुख्य सचिव ने दिए ये बड़े निर्देश
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी वाले मामलों में e-Zero FIR दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए और उसे जल्द नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया जाए।
जिलाधिकारियों को जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (DLBC) के माध्यम से बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाकर म्यूल खातों को फ्रीज करने और पीड़ितों की राशि जल्द वापस दिलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड बेचने वाले एजेंटों और संगठित गिरोहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का आदेश भी जारी किया गया।
सरकार का मानना है कि प्रशासन, पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और आम नागरिकों के साझा प्रयास से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है और लोगों को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रखा जा सकता है।

