संसद का मानसून सत्र प्रारंभ हुए 14 दिन गुजर गए। इस दौरान मानसून सत्र का अधिकांश दिन हंगामा का भेड़ चढ़ता रहा। विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में नहीं आने को लेकर आपत्ति जताते रहे और संसद का कामकाज ठप कराते रहे। विपक्षी राजनीतिक दल के प्रमुख नेता राहुल गांधी अखिलेश यादव और अन्य यह कहकर कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह छात्र आंदोलन को लेकर पूरी तरह से डरे हुए हैं और वह संसद में नहीं आ रहे हैं उनकी खिल्ली उड़ा रहे हैं। अब तो भी पहले छात्रों के भविष्य खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए पहले गृह मंत्री अमित शाह और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्तीफा तक की मांग करने लगे हैं।
विपक्ष पीएम मोदी और अमित शाह पर आरोप लगाकर खुश हो रहा है तो वहीं पीएम मोदी और अमित शाह अपने कामों को अंजाम देने में जुटे हुए। सदन में न रहते हुए भी ये वंदे मातरम , कराधान संशोधन, जन्म मृत्यु पंजीकरण और एंटी पेपर लीक जैसे अपना मनचाहा बिल सदन से पास करवा रहे हैं। पीएम मोदी और अमित शाह भले ही संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा या राज्यसभा में उपस्थित नहीं हो रहे हैं लेकिन अक्सर उन्हें संसद भवन में आपस में और एनडीए की कई नेताओं के साथ महत्वपूर्ण रणनीति पर विचार करते हुए देखा जा रहा है। दरअसल पीएम मोदी और अमित शाह इस मानसून सत्र के दौरान ही परिसीमन अधिनियम को सदन से पारित करवाने की रणनीति बना रहे हैं। लेकिन ऐसा करने से पूर्व में छात्र आंदोलन से सरकार के प्रति जनमानस में जो गुस्सा भरा हुआ है और जी गुस्से को विपक्षी राजनीतिक दल अपने हित में बना सकता है उसे समाप्त करने में जुट गए हैं।
इस दिशा में पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी विदेश से फंड लिए जाने वाले एफसीआरए कानून को भी कड़ाई से पालन कर इस छात्र आंदोलन में प्रमुख चेहरा बने अभिजीत दीप के और सोनम वांगचुक को विदेश से मिले फंडिंग के दुरुपयोग में दोषी ठहराकर इन्हें खासकर जेन जी से दूर करना चाहते हैं। भले ही सरकार पूर्व में छात्र आंदोलन से जुड़े मामले में विदेशी फंडिंग होने की जानकारी न होने की बात कह चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सरकार का इस दिशा में प्रयास जारी है।
पश्चिम बंगाल और पंजाब में गिरफ्तार हुए संदिग्ध आतंकियों का सीधा संबंध दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलन (छात्र प्रदर्शनों) में घुसपैठ करने और वहां हिंसा भड़काने की बड़ी साजिश से पाया गया है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस जांच के अनुसार, इन दोनों राज्यों में पकड़े गए आतंकियों के मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों के इशारे पर काम कर रहे थे। इस पर कार्रवाई कर भी पीएम मोदी की सरकार छात्र आंदोलन को लेकर सरकार की हो रही किरकिरी को दूर करने का प्रयास कर रही है।
इसके अलावा इस समय जेपीएससी की धांधली को लेकर छात्रों के रांची में हो रहे प्रदर्शन से भी पीएम मोदी की सरकार लाभ उठाने की दिशा में काम कर रही है। भारतीय जनता पार्टी का प्रवक्ता इन मुद्दों को पूरी गंभीरता से उठा रहा है कि नीट के मामले में जंतर मंतर पर कांग्रेस समाजवादी पार्टी शिवसेना यूबीटी, ममता बनर्जी सभी ने छात्र आंदोलन को जोरदार तरीके से उठाया था लेकिन झारखंड में जहां कांग्रेस और झामुमो की गठबंधन वाली सरकार हैं वहां जेपीएससी धांधली को लेकर छात्रों के आंदोलन को इन लोगों ने कोई समर्थन नहीं दिया है।
दूसरे शब्दों में कहें तो पीएम मोदी और अमित शाह संसद के मानसून सत्र के दौरान भले ही लोकसभा और राज्यसभा में नहीं जा रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर वह पहले तो छात्र आंदोलन से बीजेपी की हुई किरकिरी को समाप्त करने के प्रयास में जुटे हुए हैं और उसके बाद एक बड़ा बिल परिसीमन अधिनियम को संसद में किस प्रकार से लाकर इसे इस बार पास करवा लिया जाए, इस पर गहन विचार मंथन करने में जुटे हुए हैं ,ताकि इस नए परिसीमन का लाभ पहले तो 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में उठाया जाए और उसके बाद2029 के आम चुनाव में बहुमत हासिल कर सके।

