Birth and Death Registration Bill 2026: लोकसभा से पास हुआ नया बिल, जानिए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नए नियम

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Birth and Death Registration Amendment Bill 2026: केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों को और अधिक सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है। इससे पहले यह विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो चुका है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू होगा।

क्या है नया संशोधन विधेयक?

नया विधेयक जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में बदलाव का प्रस्ताव करता है। इसका मुख्य उद्देश्य देर से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और जांच आधारित बनाना है।

सरकार चाहती है कि जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण हो तथा लंबे समय बाद किए जाने वाले आवेदन की गहन जांच की जा सके, ताकि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनी रहे।

21 दिन के भीतर कराना होगा रजिस्ट्रेशन

मौजूदा नियमों के अनुसार जन्म या मृत्यु की सूचना सामान्य परिस्थितियों में 21 दिनों के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास दर्ज कराना अनिवार्य है।

यदि 21 दिन की अवधि निकल जाती है लेकिन 30 दिनों के भीतर आवेदन किया जाता है, तो निर्धारित शुल्क और प्रक्रिया पूरी करने के बाद पंजीकरण कराया जा सकता है।

30 दिन से अधिक और एक वर्ष के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने पर संबंधित अधिकारी की अनुमति और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

1 से 2 साल की देरी पर क्या होगा?

नए संशोधन के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी होती है, तो संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने के बाद ही रजिस्ट्रेशन संभव होगा।

2 साल से ज्यादा देरी पर नियम और कड़े

इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों को लेकर किया गया है।

यदि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में दो साल से ज्यादा की देरी होती है, तो अब केवल प्रशासनिक अधिकारी की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश की आवश्यकता होगी।

इस बदलाव का उद्देश्य फर्जी दावों और गलत रिकॉर्ड तैयार करने की संभावनाओं को कम करना बताया गया है।

पुराने कानून में क्या था प्रावधान?

अब तक लागू व्यवस्था के तहत एक वर्ष से अधिक पुराने मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता था।

नए संशोधन में दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अनिवार्य बनाकर नियमों को और अधिक सख्त किया गया है।

2023 में भी हुए थे बड़े बदलाव

सरकार ने वर्ष 2023 में भी जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण संशोधन किए थे।

इन बदलावों के तहत—

  1. जन्म और मृत्यु का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था लागू की गई।
  2. राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर डिजिटल डेटाबेस विकसित करने का प्रावधान किया गया।
  3. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा शुरू की गई।
  4. जन्म प्रमाण पत्र को कई सरकारी सेवाओं में जन्म तिथि और जन्म स्थान के आधिकारिक प्रमाण के रूप में मान्यता दी गई।
  5. इसका उपयोग स्कूल-कॉलेज में प्रवेश, मतदाता सूची, पासपोर्ट, सरकारी नौकरी और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया जा सकता है।

सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में अनावश्यक देरी को कम करना, रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना और फर्जी दस्तावेजों की संभावना पर रोक लगाना है।

समय पर पंजीकरण होने से नागरिकों को भविष्य में शिक्षा, रोजगार, पासपोर्ट, मतदान और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़े दस्तावेजी कार्यों में भी सुविधा मिलेगी।

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